अपने धर्म को भूलना ही सबसे बड़ा अधर्म है,,, संत लाल साई

अपने धर्म को भूलना ही सबसे बड़ा अधर्म है,,, संत लाल साई

अपने धर्म को भूलना ही सबसे बड़ा अधर्म है,,, संत लाल साई

अपने धर्म को भूलना ही सबसे बड़ा अधर्म है,,, संत लाल साई 


चंद्र दिवस श्री झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा में हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल बाबा गुरमुखदास जी के फोटो पर माला पहना कर दीप प्रज्वलित की गई वह बहराणा साहब की अखंड ज्योत जलाकर की गई

कार्यक्रम रात्रि 8:00 बजे आरंभ हुआ 11:00 बजे समापन हुआ
संतलाल साई जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि आज इंसान अपने धर्म को भूलते  जा रहा है अधर्म की राह पर चल पड़ा है अपनी बोली भाषा संस्कृति अपने तीज त्यौहार सब को भूलते जा रहा है जिसका नतीजा उल्टा हो रहा है आज हर घर घर में कलह लड़ाई झगड़े का कारण यही है चंद रुपयों के कारण अपने धर्म को छोड़कर अन्य धर्म अपना रहे हैं क्या हमारे  इष्ट देव भगवान श्री झूलेलाल  ने  इसलिए जन्म लिया था कि तुम लोग अन्य धर्म को अपनाओ 
अपने धर्म की रक्षा के खातिर हमारे पूर्वजों ने कई अत्याचार सहे अपना वतन छोड़ा धन दौलत छोड़ी घर बार छोड़ा लेकिन अपने धर्म को नहीं छोड़ा
अपने धर्म की रक्षा के लिए कई बलिदान दिए और उन्हें बलिदानों का फल है कि आज हम जीवित हैं और सुख शांति से जीवन यापन कर रहे हैं धन दौलत 4 गुना ज्यादा कमा लिए हैं फिर भी हमें चैन नहीं है इसका कारण कहीं ना कहीं अपने धर्म के प्रति लगाव व आस्था कम होना है 
सनासन धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है
बाकी जो है वह सिर्फ पंथ है 

इतिहास को देख लो पुराने ग्रंथों को देख लो पढ़ लो पता चल जाएगा पहले हमारे पूर्वज दो रोटी खाते थे और खुशी से जीवन यापन करते थे पर आज हम लोग छप्पन भोग खा रहे हैं फिर भी दुखी हैं क्यों ऐसा है मंदिर जाते हैं सत्संग सुनते हैं पर सत्संग की बातों पर अमल नहीं करते हैं दिखावे की जिंदगी जीते हैं अभी भी वक्त है संभल जाओ अपना धर्म ही श्रेष्ठ धर्म है अपने तीज त्योहार संस्कृति बोली भाषा को


 बचाना है वह उसे आगे बढ़ाना है उसके लिए जरूरी है कि अपने बच्चों को इन से जोड़ें और विदेशी संस्कृति के पीछे ना भागे अपनी संस्कृति ही सबसे महान संस्कृति है भारत जैसा देश पूरे विश्व में नहीं है जो अनेकता में एकता की पहचान है और हमें गर्व होना चाहिए कि हम लोग सिंधी हैं हमारे इष्ट देव भगवान झूलेलाल है जो जल का अवतार है जिस तरह जल के बिना जीवन अधूरा है उसी तरह सिंधी समाज भी भगवान झूलेलाल के बिना अधूरा है

आज का चंद्र दिवस  बड़ा ही महत्वपूर्ण है वह खास है क्योंकि अगले महा चालिहा उत्सव आरंभ होने वाला है अब चंद्र का मेला नया साल 2022 में लगेगा
साईं जी ने चंद्र दिवस दीपावली कि आए हुए सभी भक्तों को बहुत-बहुत बधाइयां दी वह उनके उज्जवल भविष्य के लिए कामना की
इस अवसर पर वरुण साईं रवि अनिल के द्वारा शानदार भक्ति भरे भजनों की प्रस्तुति दी गई
जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे

प्रकाश बैंड पार्टी के द्वारा कई गीतों की धुन पर भजन गाय ओर भक्त जन  झूमने  लगे आज के बहराणा साहब  की पूजा दुर्ग के भक्त जनों के द्वारा की कराई गई कार्यक्रम कें आखिर में आरती की गई विश्व कल्याण के लिए प्रार्थना  की गई पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया
प्रभु का प्रसाद भंडारा का आयोजन किया गया भक्तजनों ने भंडारा ग्रहण किया 11:00 बजे साई जी के द्वारा 
 बहराणा  साहब को सिर पर उठाकर ढोल बाजे के साथ मंदिर से निकल कर तलाब पहुंचे यहां पर विधि विधान के साथ साइ जी के द्वारा बहराणा साहब का विसर्जन किया गया अखंड ज्योत को  तराया गया इस पूरे कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण किया गया जिसमें घर बैठे हजारों की संख्या में भक्त जनों ने आज के इस कार्यक्रम का आनंद लिया इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भक्त जन बिलासपुर रायपुर कोरबा मुंगेली भाटापारा दुर्ग राजनंदगांव रायगढ़ बिल्हा  नागपुर से  शामिल हुए इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरमुखदास  सेवा समिति बिलासपुर चकरभाटा
श्री झूलेलाल महिला सखी सेवा  ग्रुप के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा

श्री विजय दुसेजा जी की खबर

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