गोपाष्टमी के दिन गाय की पूजा अर्चना करने से 33 कोटि देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है
गोपाष्टमी का पर्व देश भर में शारदा भक्ति व हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया
गोपाष्टमी का पर्व क्यों मनाया जाता है इसके बारे में पौराणिक कथाओं के मान्यता के अनुसार बताया गया है
गोपाष्टमी के दिन ही भगवान श्री कृष्ण गायों की पूजा अर्चना करके प्रथम बार गायों को वन में चराने के लिए के लिए घर से निकले थे
इसीलिए गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है
सबसे पहले गौ माता को पैरों को जल से धोया जाता है माथे पर तिलक लगाया जाता है फूल माला पहनाई जाती है आरती की जाती है वह सात प्रकार के फल वह रोटी मिष्ठान अनाज गौ माता को खिलाई जाती है
कहा जाता है गाय के शरीर में 33 कोटी प्रकार के देवी देवता वास करते हैं अर्थात 33 प्रकार के देवी देवता का वास है गाय के शरीर में जिसमें गाय के हृदय में भगवान नारायण गाय के गोबर में मां लक्ष्मी गाय के मूत्र मा गंगा गाय के उदर में कार्तिकेय मस्तक में ब्रह्मा लालट में रूद्र सिंग में इंद्र
दोनों कानों में अश्वनी कुमार
नेत्रों में सूर्य और चंद्र
दातों में गरुड़ जुबान में सरस्वती पूछ में भगवान हनुमान
ऐसे ही गाय के अलग-अलग शरीर के भागों में अलग-अलग देवी देवता वास करते हैं कहा जाता है कि अगर किसी के रुके हुए काम ना होते हो बार-बार परेशान होता हो तो वह गाय के कानों में कहने से उसके रुके हुवे कार्य पूरे हो जाते हैं वह गाय के दूध में साक्षात अमृत होता है जिससे पीने से कई बीमारी खत्म हो जाती है गाय की पूजा अर्चना से 33 प्रकार के देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है वह पुण्य मिलता है वह घर में सुख शांति समृद्धि व बरकत भी होती है
वह अमृत मंथन के समय आज ही के दिन कामधेनु गाय अमृत मंथन से निकली थी इसलिए आज के दिन का महत्व और बढ़ जाता है गाय की पूजा अर्चना से लाभ होता है
बिलासपुर में भी लोगों ने सुबह-सुबह स्नान करके गौमाता के फल खिलाए अलग प्रकार के मिष्ठान खिलाएं और उनकी पूजा अर्चना करके आशीर्वाद लिया
मंदिरों में गोपाष्टमी की कथा की गई भगवान श्री कृष्ण की आराधना की गई
श्री विजय दुसेजा जी की खबर