निंदा ही सबसे बड़ा पाप है... संत लाल साई
श्री झूलेलाल मंदिर हेमू नगर बिलासपुर में सत्संग का आयोजन किया गया सत्संग की शुरुआत भगवान झूलेलाल बाबा गुरमुख दास जी के मूर्ति पर माला पहनाकर दीप प्रज्वलित कर के गई
सत्संग में अपनी अमृतवाणी में संत लाल साई जी ने
भगवान झूलेलाल की महिमा बताइ वह कई ज्ञानवर्धक कहानी कथा बताई
एक गांव में राम नाम का आदमी महायज्ञ का आयोजन करता है और प्रति दिन यज्ञ के साथ भंडारे का भी आयोजन होता है
एक दिन एक चील वहां से गुजरता है वह एक सांप को देखता है तो उसे मुंह में पकड़कर हवा में उड़ने लगता है सांप अपने को छुड़ाने के चक्कर में ऊपर से गिरता है और नीचे भंडारा तैयार होते रहता है जिसमें वह सांप खीर के बड़े से गंज में गिर जाता है भंडारा बनाने वाले को इस बात का पता नहीं चल पाता है यज्ञ के समापन के बाद पहले भोजन की थाली संत को दी जाती है संत पूरा खाना खाने के बाद आखिर जैसे ही खीर की कटोरी ले कर पीता है चंद मिनटों में ही मर जाता है बाकी लोग देखकर सब हैरान हो जाते हैं वह खाना बनाना वाले दिलीप से पूछते हैं कि तुमने खाने में क्या मिलाया है उसने कहा मैंने कुछ नहीं मिलाया है तब गांव वाले जाते हैं खाने के बर्तन को चेक करते हैं तो फिर खीर के गंज में मरा हुआ सांप मिलता है
गांव वाले और भोजन बनाने वाले दिलीप पर बहुत गुस्सा होते हैं वह दिलीप कहता है इसमें मेरी कोई गलती नहीं है मैंने नहीं देखा कि खीर के गंज में सांप गिर गया है तब वहां के एक बच्चे ने बताया कि कुछ समय पहले
मैंने देखा कि
एक चील सांप को मुंह में पकड़कर हवा में उड़ रहा था अचानक चील के मुंह से निकलकर सांप सीधे खीर के गंज में आकर गिर जाता है तब गांव वाले को सारी बात पता चलती है पंचायत बैठती है वह इस बात पर फैसला नहीं कर पाती है कि दोषी कौन है यज्ञ कराने वाला राम खाना बनाने वाला दिलीप या चील जो हवा में उड़ रहा था या सांप जो इस खीर में गिरा आखिर किसे दोषी माना जाए उस ब्रह्महत्या का पंचायत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाती है और यह बात ऊपर भगवान के पास भी पहुंची है भगवान ने कहा इसका फैसला कल बताएंगे दूसरे दिन फिर से यज्ञ आरंभ हुआ
तो कुछ गांव वाले रास्ते में रुक कर यज्ञ में जाने वालो लोगों को रोक रहे थे कह रहे थे कि राम के यज्ञ में मत जाओ वह पापी है ब्राह्मण का हत्यारा है खीर में मरा हुआ सांप डालकर लोगों को खिलाता है
तब कुछ समय बाद आकाशवाणी होती है गांव वालों उस हत्या का दोषी और कोई नहीं बल्कि ये लोग हैं जो निदा कर रहे हैं वह लोगों को यज्ञ में जाने से रोक रहे हैं
अर्थात जो व्यक्ति किसी की भी निंदा करता है वह ब्रह्महत्या का जो पाप है उतना ही बड़ा व पापी कहलाता है
इसीलिए कभी भी किसी भी संत की ओर ना ही किसी व्यक्ति की निंदा ना करें अगर आप उसकी निंदा करते हैं तो उसके पाप आप अपने ऊपर लेते हैं
सत्संग में जब जाते हैं उस समय साधारण वस्त्र साधारण वेशभूषा में और खाली दिमाग से जाना चाहिए
ताकि जब सत्संग में संत कोई बात बताएं तो उसे अपने दिमाग में बैठाये वह घर में आकर उस पर अमल करें
अगर सादे कपड़े सादे रूप में जाएंगे तो हमारा ध्यान सत्संग की बातों पर रहेगा और अगर हम सज धज कर जाएंगे तो हमारा ध्यान एक दूसरे को लोगों को देखने में रह जाएगा और जो संत की अमृतवाणी हैं वह हम न सुन पाएंगे और ना ही उस पर अमल कर पाएंगे हमारा ध्यान भटक जाएगा सत्संग में हम भगवान को देखने जाते हैं संत की वाणी सुनने जाते हैं ना कि अपनी वेशभूषा वह अपने सिंगार को लोगों को दिखाने जाते हैं लोगों को दिखाना है तो अपनी भक्ति दिखाओ अपनी शालीनता दिखाओ अपना त्याग दिखाओ अपनी संस्कृति अपनी भाषा और अपने सत्य कर्म दिखाओ
सत्संग में साइ जी के द्वारा
कई भक्ति भरे भजन गाए
जिसको घर में रहने का नशा है
घर में रहे जिसको दुकान में बैठने का नशा है वह दुकान में बैठे
और जिसको भगवान झूलेलाल के प्यार का नशा है वह झूलेलाल मंदिर चकरभाटा में आए
साईं के मंदिर में मौज मची देखो झूलेलाल का चालिहा आया है
चलो चलें चालिहे में
मंदिर जाओ गुरुद्वारे जाओ माता के पास जाओ शिर्डी जाओ पर मत भूलो अपने झूलेलाल को कियो की सिंधीयो का भगवान एक ही है झूलेलाल
ऐसे व अन्य कई भक्ति भरे भजन गाये जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे
सत्संग के आखिर में घाघर की महिमा बताई
अरदास की गई विश्व कल्याण के लिए पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया इस पूरे सत्संग के कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा गुरमुखदास सेवा समिति बिलासपुर सभी सेवादारों का विशेष सहयोग रहा
श्री विजय दुसेजा जी की खबर