*तकनीकी खराबी के नाम पर गरीबों के घर का चूल्हा बंद करना घोर अन्याय - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग शहर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में पिछले 6 महीनों से चल रही गंभीर अनियमितता को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग कलेक्टर अभिजित सिंह से मांग की है कि नियमों और प्रणालियों का बहाना बनाकर गरीबों के पेट पर लात मारना बंद किया जाए और त्योहारों के इस सीजन में रुकी हुई पेंशन का तुरंत भुगतान सुनिश्चित किया जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को संबल देना है। लेकिन दुर्ग जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण दुर्ग शहर के लगभग 3,000 से अधिक लाचार वृद्ध,अत्यंत गरीब विधवा महिलाएं और दिव्यांग हितग्राही पिछले आधा साल से एक-एक रुपये के लिए तरस रहे हैं। यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं,बल्कि एक मानवीय संकट है।भारत सरकार द्वारा पारदर्शिता के लिए लागू की गई नई एसएनए–स्पर्श प्रणाली की तकनीकी अड़चनों का ठीकरा स्थानीय अधिकारी अपनी नाकामी छुपाने के लिए हितग्राहियों पर फोड़ रहे हैं।डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और आधार सीडिंग के नाम पर 80-90 साल के अत्यंत वृद्ध जनों और चल-फिर पाने में असमर्थ दिव्यांगों को इस ढलती उम्र में नगर निगम और समाज कल्याण विभाग के दफ्तरों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं,जो कि बेहद निंदनीय है।क्या जिला प्रशासन को यह दिखाई नहीं देता कि उम्र बढ़ने के कारण कई बुजुर्गों के हाथों की रेखाएं मिट चुकी हैं? शारीरिक अक्षमता की वजह से दिव्यांगों के अंगूठे के निशान मशीनों में मैच नहीं हो रहे हैं।महज इस तकनीकी त्रुटि को आधार बनाकर किसी गरीब के घर का चूल्हा बंद कर देना कहाँ का न्याय है? डॉ. प्रतीक उमरे ने मांग किया है कि जिन बुजुर्गों या दिव्यांगों का डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट अंगूठे का निशान न मिलने से अटका है,उनके सत्यापन के लिए नगर निगम के कर्मचारी वार्डों में जाकर भौतिक सत्यापन करें,न कि उन्हें दफ्तर बुलाकर प्रताड़ित किया जाए तथा पिछले 6 महीनों की जितनी भी राशि लंबित है, उसका पूरा एरियर तुरंत हितग्राहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाए।