*खरोरा के कृष्णा चौक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनूठी झलक, जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र*

*खरोरा के कृष्णा चौक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनूठी झलक, जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र*

*खरोरा के कृष्णा चौक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनूठी झलक, जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र*
रिपोर्टर रोहित वर्मा 
लोकेशन खरोरा 

*खरोरा के कृष्णा चौक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की अनूठी झलक, जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति का पंडाल बना आकर्षण का केंद्र*
खरोरा
नवरात्रि के पावन अवसर पर नगर पंचायत खरोरा के वार्ड क्रमांक 07 स्थित कृष्णा चौक में जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति द्वारा तैयार किया गया पंडाल श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस वर्ष समिति ने प्राचीन छत्तीसगढ़ी जनजीवन और पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को अपनी झांकी का आधार बनाया है। पंडाल में माता रानी अपने परिवार के साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिवेश में विराजमान हैं, जो श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ रहा है।
प्राचीन छत्तीसगढ़ी जनजीवन को किया जीवंत
समिति की ओर से तैयार झांकी में छप्पर वाले पुराने ग्रामीण घर का स्वरूप दर्शाया गया है। इसमें माता दुर्गा को सूपा से चावल साफ करते हुए और भगवान भोलेनाथ को रस्सी बटते हुए दिखाया गया है। वहीं बाल रूप में भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय को खेलते हुए प्रस्तुत किया गया है। ग्रामीण जीवन से जुड़े इन पारंपरिक दृश्यों ने झांकी को विशिष्ट पहचान दी है।
झांकी के माध्यम से समिति ने छत्तीसगढ़ की पुरानी जीवनशैली, घरेलू परंपराओं और लोकसंस्कृति को सजीव रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यह प्रस्तुति नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक जीवन मूल्यों से परिचित कराने का संदेश भी देती है।
समिति के सदस्य स्वयं करते हैं पंडाल का निर्माण
जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति की खासियत यह है कि पंडाल की रूपरेखा से लेकर सजावट और झांकी निर्माण तक का अधिकांश कार्य समिति के सदस्य स्वयं करते हैं। इसके लिए किसी किराया भंडार या बाहरी सजावट एजेंसी की मदद नहीं ली जाती। सदस्य आपसी सहयोग, मेहनत और रचनात्मक सोच के साथ हर वर्ष एक नई थीम पर पंडाल तैयार करते हैं।
समिति के सदस्यों के लिए यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि माता रानी के प्रति भक्ति, सेवा और समर्पण का माध्यम है। अपने हाथों से पंडाल तैयार कर माता की स्थापना करना उन्हें आत्मिक संतोष प्रदान करता है।
हर साल नई थीम से बनाती है अलग पहचान
समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष कुछ नया प्रस्तुत करने की परंपरा के चलते नगरवासियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में पंडाल को लेकर विशेष उत्सुकता रहती है। इस बार छत्तीसगढ़ी परंपराओं पर आधारित झांकी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है।
आधुनिक साज-सज्जा के दौर में पारंपरिक ग्रामीण परिवेश को केंद्र में रखकर तैयार की गई यह प्रस्तुति स्थानीय संस्कृति के संरक्षण का सराहनीय प्रयास है। जय माँ शेरावाली दुर्गोत्सव समिति, कृष्णा चौक, वार्ड क्रमांक 07 खरोरा का यह आयोजन आस्था, रचनात्मकता और छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के प्रति समर्पण का उदाहरण बन गया है। माता रानी के जयकारों के बीच यह पंडाल श्रद्धालुओं को भक्ति के साथ छत्तीसगढ़ की माटी, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की अनुभूति करा रहा है।

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