*दुर्ग की जनता को 'प्रदूषण के डेथ वारंट' पर छोड़ सो रहा है निगम प्रशासन - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*दुर्ग की जनता को 'प्रदूषण के डेथ वारंट' पर छोड़ सो रहा है निगम प्रशासन - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग शहर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉ. प्रतीक उमरे ने इस गंभीर जन-स्वास्थ्य संकट पर संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से दुर्ग शहर के लिए एक 'विशेष आपातकालीन कार्ययोजना' तैयार करने का पुरजोर आग्रह किया है।उन्होंने सीधे तौर पर स्थानीय नगर निगम प्रशासन,परिवहन विभाग और जिला प्रशासन की त्रिमूर्ति को इस बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराया है।उन्होंने कहा कि दुर्ग में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खतरे के निशान को पार कर रहा है।शहर के लोग अब हवा नहीं,बल्कि धीमा जहर सांस के रास्ते अपने फेफड़ों में खींचने को मजबूर हैं।प्रशासन की भूमिका गैर-जिम्मेदाराना ही नहीं,बल्कि आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग में वायु प्रदूषण बढ़ने से लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं।प्रदूषित हवा में लोग सांस लेने को विवश हैं।दुर्ग में बढ़ते प्रदूषण पर दुर्ग नगर निगम की भूमिका भी गैरजिम्मेदाराना है।वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा धूल के कण होते हैं।यह निर्माण कार्यों से उड़ते हैं।भवनों का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि धूल न उड़े।निर्माण स्थल को ढका जाना चाहिए।लेकिन दुर्ग नगर निगम द्वारा इस तरफ भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।एनजीटी ने पुराने डीजल एवं पेट्रोल वाहनों पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद शहर में बड़े पैमाने पर पुराने वाहन चल रहे हैं। वाहनों से फैल रहे प्रदूषण को रोकने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है।लेकिन परिवहन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी इस पर मौन है lजिले में बड़े पैमाने पर उद्योग जहरीला धुआं उगल रहे हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन की कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित है।नोटिस के बाद स्थिति में थोड़ा बहुत सुधार होता है। लेकिन स्थिति फिर वही हो जाती है।दुर्ग शहर में वायु प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है,इसके चलते सड़कों पर चलना भी दूभर हो गया है,इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है, सड़कों की खराब स्थिति को लेकर कई बार पहल करने के बाद भी निगम प्रशासन इसे लेकर बिल्कुल गंभीर नही है,सड़कों पर बने गड्ढे से तो लोग पहले ही परेशान हो रहे थे,अब उड़ती धूल का भी सामना करना पड़ रहा है,बढ़ते प्रदूषण से लोगों की आंखों के साथ सेहत पर भी असर पड़ रहा है,दुर्ग में धूल का प्रदूषण लोगों की सेहत बिगाडऩे के स्तर पर है।दुर्ग में डस्ट एलर्जी,क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस,अस्थमा के दौरों और आंखों में जलन के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।सड़कों के जर्जर होने के कारण जब गाड़ियां गुजरती हैं,तो सड़क पर जमा 'सिल्ट' हवा में री-सस्पेंड होती है,जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में बैठ जाती है।डॉ. प्रतीक उमरे ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि दुर्ग के लिए एक स्वतंत्र और कड़ा 'क्लीन एयर एक्शन प्लान' तैयार किया जाए,ताकि उद्योगों,वाहनों और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित कर दुर्ग के नागरिकों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का उनका मौलिक अधिकार मिल सके।