*बच्चोंकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने माताओं ने लिया संकल्पशासकीय प्राथमिक शाला छड़िया में विशिष्ट बच्चों की पहचान एवं जागरूकता कार्यशाला आयोजित*
*बच्चोंकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने माताओं ने लिया संकल्प
शासकीय प्राथमिक शाला छड़िया में विशिष्ट बच्चों की पहचान एवं जागरूकता कार्यशाला आयोजित*
विकासखंड तिल्दा-नेवरा के अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला छड़िया में एनजीओ कारितास इंडिया की खुशहाल बचपन परियोजना के तत्वावधान में गांव की माताओं एवं महिलाओं के लिए विशिष्ट बच्चों की पहचान एवं जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ऐसे बच्चों की पहचान एवं उनकी शैक्षणिक स्थिति पर चर्चा की गई, जो किन्हीं कारणों से नियमित रूप से विद्यालय नहीं आ पाते हैं। इस दौरान बच्चों की
अनियमित उपस्थिति के कारणों पर विचार-विमर्श करते हुए उनके समाधान के लिए सतत पालक संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी। माताओं से विशेष आग्रह किया गया कि प्रत्येक माता अपने आसपास के तीन ऐसे बच्चों को विद्यालय आने और नियमित पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी उठाए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उपस्थित महिलाओं ने इस पहल में सक्रिय सहयोग देने तथा बच्चों की शिक्षा के प्रति परिवार और समाज में जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।प्रधान पाठक धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल
विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें माता-पिता और पूरे समाज की समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कोई भी बच्चा परिस्थितियों या पारिवारिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा। माताएं बच्चों की पहली गुरु होती हैं, इसलिए वे बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यशाला में एनजीओ की कार्यकर्ता सरिता मधुकर, रुकसाना एवं कुसुमलता साहू के साथ शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला छड़िया के प्रधान
पाठक धीरेंद्र कुमार वर्मा, शासकीय प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक शांता पठारे एवं शिक्षिका सुनीता जंघेल उपस्थित रहीं। इसके अलावा विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा गांव की बड़ी संख्या में माताओं एवं महिलाओं ने सहभागिता निभाई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बच्चों की विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, शिक्षा के प्रति अभिभावकों की जिम्मेदारी बढ़ाना तथा सामुदायिक सहभागिता से प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना रहा।