*आयुष्मान योजना में जनता के हक पर डाका डालने वाले निजी अस्पतालों का हो 'सुरक्षा ऑडिट' : डॉ. प्रतीक उमरे*
*आयुष्मान योजना में जनता के हक पर डाका डालने वाले निजी अस्पतालों का हो 'सुरक्षा ऑडिट' : डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्य सचिव विकासशील से केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' का प्रदेश स्तर पर व्यापक "सुरक्षा, प्रशासनिक और तकनीकी ऑडिट" कराने की पुरजोर मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस ऐतिहासिक जनकल्याणकारी योजना का लाभ राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए व्यवस्थागत खामियों को दुरुस्त करना अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई निजी अस्पतालों द्वारा वैध आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद गरीब मरीजों को कैशलेस इलाज देने से मना किया जा रहा है।कई गंभीर मामलों में मरीजों के परिजनों को 'आउट ऑफ पॉकेट' भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता है,जो कि योजना के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।डॉ. प्रतीक उमरे ने दो टूक शब्दों में कहा कि विष्णुदेव साय सरकार में गरीबों के हक पर डाका डालने वाले ऐसे किसी भी निजी संस्थान या सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाना चाहिए।सुशासन की सरकार में तानाशाही और मरीजों का शोषण बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।उन्होंने मुख्य सचिव से मांग की है कि 'स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ' और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल्स पर अनधिकृत पहुंच को रोकने के लिए एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम आधारित सुरक्षा तंत्र मजबूत किया जाए तथा प्रदेश के उन चिन्हित निजी अस्पतालों की बारीकी से जांच हो, जिनके क्लेम रेशियो अचानक बहुत ऊंचे पाए गए हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 'डिजिटल और पारदर्शी छत्तीसगढ़' के संकल्प के तहत प्रशासनिक अधिकारियों को पूरी ईमानदारी से काम करना होगा।सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों का लाभ जनता को शत-प्रतिशत मिलना चाहिए।उन्होंने मुख्य सचिव विकासशील इस संवेदनशील विषय की गंभीरता को समझते हुए तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सुरक्षा और प्रशासनिक ऑडिट के कड़े निर्देश जारी करने की मांग किया है।