*प्रधानमंत्री पर ‘देशद्रोही’ टिप्पणी से गरिमा पर सवाल, राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार समिति में जांच की मांग*

*प्रधानमंत्री पर ‘देशद्रोही’ टिप्पणी से गरिमा पर सवाल, राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार समिति में जांच की मांग*

*प्रधानमंत्री पर ‘देशद्रोही’ टिप्पणी से गरिमा पर सवाल, राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार समिति में जांच की मांग*
*प्रधानमंत्री पर ‘देशद्रोही’ टिप्पणी से गरिमा पर सवाल, राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार समिति में जांच की मांग*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में ‘देशद्रोही’ जैसे गंभीर शब्दों के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।इस संबंध में उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मामले का संज्ञान लेने तथा इसे लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की नीतियों,निर्णयों और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है,लेकिन राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत एवं अत्यंत गंभीर आरोपों तक ले जाना लोकतांत्रिक संवाद की मर्यादा के लिए गंभीर प्रश्न खड़े करता है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि प्रधानमंत्री के पद पर आसीन व्यक्ति के विरुद्ध इस प्रकार की गंभीर शब्दावली का सार्वजनिक प्रयोग केवल राजनीतिक बयान नहीं माना जा सकता,इसकी संसदीय मर्यादा और विशेषाधिकारों के संदर्भ में भी जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष स्वयं संसद के सर्वोच्च सदन के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर हैं,इसलिए उनके सार्वजनिक वक्तव्यों में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक पदों की गरिमा का विशेष ध्यान अपेक्षित है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि आरोप लगाना राजनीतिक अधिकार हो सकता है,लेकिन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना अलग विषय है।यदि किसी संवैधानिक संस्था या संवैधानिक पदाधिकारी के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उनके समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए और उपयुक्त संवैधानिक एवं कानूनी मंच पर उनकी जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध ‘देशद्रोही’ जैसे शब्दों का प्रयोग राजनीतिक विमर्श की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो सकती है,लेकिन व्यक्तिगत आरोपों और असंसदीय भाषा के स्थान पर तथ्यों, नीतियों और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर बहस होनी चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए,ताकि भविष्य में संवैधानिक पदों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संबंध में सार्वजनिक विमर्श गरिमापूर्ण एवं तथ्याधारित बना रहे।

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