*छत्तीसगढ़ में ब्यूरोक्रेसी की निरंकुशता पर पीएमओ सख्त,भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे के पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान*

*छत्तीसगढ़ में ब्यूरोक्रेसी की निरंकुशता पर पीएमओ सख्त,भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे के पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान*

*छत्तीसगढ़ में ब्यूरोक्रेसी की निरंकुशता पर पीएमओ सख्त,भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे के पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान*
*छत्तीसगढ़ में ब्यूरोक्रेसी की निरंकुशता पर पीएमओ सख्त,भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे के पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान*
छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे निरंकुश प्रशासनिक अधिकारियों पर अब प्रधानमंत्री कार्यालय की गाज गिरनी तय हो गई है। दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में चल रही मनमानी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए ध्यानाकर्षण ज्ञापन पर पीएमओ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है।प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस संवेदनशील शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे तत्काल अवर सचिव मुकुल दीक्षित को अग्रसारित कर दिया है।इस कदम के बाद छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक लॉबी में हड़कंप मच गया है,क्योंकि अब जमीनी कार्यकर्ताओं से बदसलूकी करने वाले अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने सीधे प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में छत्तीसगढ़ की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है।उन्होंने अपने ज्ञापन में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया

*अधिकारियों का अमर्यादित रवैया*
राज्य के विभिन्न विभागों और जिला प्रशासनों में बैठे कुछ अधिकारी उन निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार नहीं कर रहे हैं, जिन्होंने विपक्ष में रहकर संघर्ष के दिनों में पार्टी का झंडा उठाए रखा था।

*दोबारा सरकार गठन पर संकट*
डॉ. प्रतीक उमरे ने आगाह किया है कि निरंतर हो रही इस प्रशासनिक उपेक्षा से उस जमीनी कार्यकर्ता का मनोबल टूट रहा है, जो जनता और सरकार के बीच की सबसे मजबूत कड़ी है।यदि अफसरों का यह असहयोगात्मक और तानाशाही रुख जारी रहा तो कार्यकर्ताओं में निराशा घर कर जाएगी, जिसका सीधा असर आगामी चुनावों पर पड़ेगा और राज्य में भाजपा की दोबारा सरकार बनाना अत्यंत मुश्किल हो जाएगा।


*पीएमओ के संज्ञान से मंचा हड़कंप*
डॉ. प्रतीक उमरे के इस पत्र पर 24 घंटे के भीतर पीएमओ द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद यह साफ हो गया है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के राजनीतिक घटनाक्रम और ब्यूरोक्रेसी के रवैये को लेकर बेहद गंभीर है।संगठन के गलियारों में इस बात की जमकर चर्चा है कि आम जनता और जनसेवकों से दुर्व्यवहार करने वाले निरंकुश अधिकारियों को चिन्हित कर जल्द ही उन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

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