**ग्राम अरजपुरी में श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ कमरछठ (हलषष्ठी) महापर्व; माताओं ने की संतान के दीर्घायु जीवन की कामना**
**प्रेस विज्ञप्ति**
**ग्राम अरजपुरी में श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ कमरछठ (हलषष्ठी) महापर्व; माताओं ने की संतान के दीर्घायु जीवन की कामना**
**अरजपुरी (विशेष संवाददाता):**
मातृ-हृदय के अगाध वात्सल्य, अखंड आस्था और लोक-संस्कृति का पावन प्रतीक 'कमरछठ' (हलषष्ठी) महापर्व ग्राम अरजपुरी में असीम श्रद्धा, पारंपरिक गरिमा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। भाद्रपद मास की षष्ठी तिथि के इस पुण्य अवसर पर ग्राम की समस्त माताओं ने अपनी संतानों के आरोग्य, सुदीर्घ जीवन और मंगलमय भविष्य की मंगलकामना करते हुए निर्जला व्रत धारण किया।
प्रातःकाल से ही संपूर्ण ग्राम का वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप ग्राम के विभिन्न मुहल्लों में विधि-विधान पूर्वक सगरी (कृत्रिम जलाशय) का निर्माण किया गया। माताओं ने समूहबद्ध होकर सगरी के तट पर कांसी के फूल, पलाश, महुआ की डालियों और बेर आदि प्राकृतिक वनस्पतियों की स्थापना कर भगवान शिव, माता पार्वती तथा हलधर भगवान बलराम की षोडशोपचार पूजा-अर्चना की।
**पर्व की प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक झलकियाँ:**
* **कथा-श्रवण व मंगल विधान:** पुरोहितों एवं वरिष्ठ महिलाओं द्वारा हलषष्ठी की पावन पौराणिक व्रतकथा का वाचन किया गया, जिसे उपस्थित मातृशक्ति ने एकाग्रचित्त होकर श्रवण किया और सामूहिक आरती के उपरांत संतान के मस्तक पर आशीर्वचन स्वरूप तिलक लगाया।
* **पारंपरिक छह भाजियों का भोग:** देव-पूजन में छह प्रकार की बिना हल जोती भाजियों, महुआ के पत्तों, भुने हुए अनाज (लाही) तथा भैंस के दूध से निर्मित दही-घी का विशेष नैवेद्य अर्पित किया गया।
* **पसाई चावल से पारणा:** दिनभर के कठोर तप एवं निर्जला उपवास के पश्चात, सायंकाल माताओं ने बिना जुते खेत में स्वतः उत्पन्न होने वाले 'पसाई चावल' (तिन्नी धान) और छह भाजियों के प्रसाद से अपना व्रत पूर्ण किया।
अरजपुरी की मातृशक्ति ने इस अनुष्ठान के माध्यम से न केवल अपनी संतानों के कल्याण की कामना की, अपितु प्रकृति और पारंपरिक संस्कृति के प्रति सनातन परंपरा के अटूट समर्पण को भी जीवंत कर दिया। पर्व के समापन पर पूरा ग्राम आध्यात्मिक ऊर्जा और आनंद से परिपूर्ण दिखाई दिया।