*पत्नी की लाश के पास पूरी रात मदद की आस में बैठा रहा असहाय बुजुर्ग, सुबह पहुंचे जनप्रतिनिधि तो बने सहारा*

*पत्नी की लाश के पास पूरी रात मदद की आस में बैठा रहा असहाय बुजुर्ग, सुबह पहुंचे जनप्रतिनिधि तो बने सहारा*

*पत्नी की लाश के पास पूरी रात मदद की आस में बैठा रहा असहाय बुजुर्ग, सुबह पहुंचे जनप्रतिनिधि तो बने सहारा*
रिपोर्टर रोहित वर्मा 
लोकेशन खरोरा 

*पत्नी की लाश के पास पूरी रात मदद की आस में बैठा रहा असहाय बुजुर्ग, सुबह पहुंचे जनप्रतिनिधि तो बने सहारा*

*खरोरा में मानवता की मिसाल: बेसहारा बुजुर्ग के लिए पार्षदों ने निभाया अपना फर्ज*
खरोरा
आंखों में आंसू, सामने पत्नी का पार्थिव शरीर और दिल में एक ही सवाल—अब अंतिम संस्कार कौन करेगा?
खरोरा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 08 में सामने आया यह मार्मिक दृश्य हर किसी को भावुक कर देने वाला था।

रायपुर रोड किनारे पेड़ के नीचे झोपड़ी बनाकर मेहनत-मजदूरी से जीवन गुजारने वाले बुजुर्ग दंपत्ति ज्योतिष गेन्ड्रे और गुलाब राम गेन्ड्रे की जिंदगी पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दो दिन पूर्व ज्योतिष गेन्ड्रे की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर स्थित मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
रात में एंबुलेंस से शव खरोरा पहुंचा, लेकिन अंतिम संस्कार कराने वाला कोई नहीं था। शारीरिक रूप से असहाय गुलाब राम गेन्ड्रे पूरी रात अपनी पत्नी के पार्थिव शरीर के पास बैठे रहे। परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण वे बेहद असहाय थे। रात से लेकर अगली सुबह करीब 11 बजे तक वे आने-जाने वाले लोगों को उम्मीद भरी और नम आंखों से निहारते रहे।

एक किसान ने दी सूचना, फिर पहुंचे तीन पार्षद

अगले दिन गाय-भैंस चराने पहुंचे किसान विजय यादव की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर पड़ी। उन्होंने तत्काल अपने पार्षद को सूचना दी।

सूचना मिलते ही वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद सुरेंद्र गिलहरे, वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद जयप्रकाश वर्मा और वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद शेखर देवांगन तत्काल मौके पर पहुंचे।

पार्षदों ने थाना एवं नगर पंचायत को सूचना देकर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करवाई और इसके बाद स्वयं मृतका के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई।

“हम हैं ना…” — और खुद कंधा बनकर खड़े हुए जनप्रतिनिधि

सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाली डबरी स्थित मुक्तिधाम में मृतका ज्योतिष गेन्ड्रे का अंतिम संस्कार कराया गया। जनप्रतिनिधियों ने स्वयं आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई।

पत्नी को खो चुके गुलाब राम गेन्ड्रे इस दौरान फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने तीनों पार्षदों को भावुक होकर धन्यवाद दिया और आशीर्वाद दिया।

यह घटना केवल एक अंतिम संस्कार की नहीं, बल्कि उस समय मानवता के साथ खड़े होने की है, जब एक असहाय व्यक्ति को सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत थी।

खरोरा में इस मानवीय पहल की चर्चा लोगों के बीच भी होती रही।

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