सेक्टर 2 में श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ श्री संत गजानन महाराज समाधि सोहळा

सेक्टर 2 में श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ श्री संत गजानन महाराज समाधि सोहळा

सेक्टर 2 में श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ श्री संत गजानन महाराज समाधि सोहळा
सेक्टर 2 में श्रद्धा और उल्लास से संपन्न हुआ श्री संत गजानन महाराज समाधि सोहळा

सेक्टर 2: उषा एवं प्रशांत क्षीरसागर के निवास पर श्री संत गजानन महाराज का पावन संजीवन समाधि सोहळा बड़े ही हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर 'गण गण गणात बोते' के जयघोष से संपूर्ण परिसर गुंजायमान रहा।
दिन की शुरुआत महाराज जी की प्रतिमा के जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और नए वस्त्र-दुपट्टा अर्पण कर मनमोहक पुष्प शृंगार के साथ हुई। इसके बाद श्री गजानन विजय ग्रंथ के संपूर्ण 21 अध्यायों का पारायण उषा क्षीरसागर द्वारा पूर्ण श्रद्धा के साथ किया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों की शृंखला में हरिपाठ, भजन-कीर्तन और गोपालकाला का आयोजन हुआ। महिला मंडल के साथ मिलकर कीर्तनकार कैलास धाडसे ने सुमधुर कीर्तन प्रस्तुत किया, जिसमें तबले पर एम. के. पाटील और हारमोनियम पर पांडे काकाजी ने सुंदर संगति दी। गोपालकाला के उपरांत उत्साहपूर्वक दहीहंडी फोड़ी गई।
समाधि सोहळे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने कहा कि ऋषि पंचमी (8 सितंबर 1910) के दिन शेगांव में महाराज जी ने महा संजीवन समाधि ली थी। संतश्री ने संदेश दिया था कि मानव शरीर केवल एक वस्त्र के समान है जिसे बदलना आवश्यक है, और वे सदैव सूक्ष्म रूप से अपने भक्तों की रक्षा में उपस्थित रहेंगे।
विशेष महाप्रसाद का वितरण
महाराज जी को प्रिय पारंपरिक व्यंजनों का विशेष भोग लगाया गया, जिसमें झुणका-भाकर, अंबाडी की भाजी, मिर्ची का ठेचा और बेसन का हलवा शामिल था। पूजन और महाआरती के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं में महाप्रसाद वितरित किया गया।
इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से उषा क्षीरसागर, प्रशांत क्षीरसागर, पीयूष क्षीरसागर, रुद्र क्षीरसागर, सनातनी प्रेरक मनोज ठाकरे, प्रकाश ठाकरे, लीलाबाई, कुसुमताई, ज्योती, विजय माहूरकर सहित बड़ी संख्या में गजानन माऊली भक्तजन उपस्थित रहे।

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