*मजदूर अधिकारों के लिए सड़कों पर देश: बी.एम.एस ने किया एकदिवसीय धरना प्रदर्शन : 17 अगस्त 2026 को हुआ देशव्यापी आंदोलन*

*मजदूर अधिकारों के लिए सड़कों पर देश: बी.एम.एस ने किया एकदिवसीय धरना प्रदर्शन : 17 अगस्त 2026 को हुआ देशव्यापी आंदोलन*

*मजदूर अधिकारों के लिए सड़कों पर देश: बी.एम.एस ने किया एकदिवसीय धरना प्रदर्शन : 17 अगस्त 2026 को हुआ देशव्यापी आंदोलन*
*मजदूर अधिकारों के लिए सड़कों पर देश: बी.एम.एस ने किया एकदिवसीय धरना प्रदर्शन : 17 अगस्त 2026 को हुआ देशव्यापी आंदोलन*
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री और इस धरना प्रदर्शन के मुख्य वक्ता मुश्ताक अहमद अंसारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि देश की आर्थिक नींव रखने और उत्पादन क्षेत्र में दिन-रात पसीना बहाने वाला मजदूर वर्ग आज भी घोर उपेक्षा और असुरक्षा का सामना कर रहा है। बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और काम की बदलती परिस्थितियों ने आम मजदूरों के पारिवारिक जीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है। ऐसी स्थिति में, मजदूरों की लंबे समय से लंबित मांगों का तत्काल समाधान करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने हेतु भारतीय मजदूर संघ *(बी.एम.एस) ने 17 अगस्त 2026 को देशव्यापी आंदोलन का किया*।

रांची में आयोजित केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक के निर्णय के अनुसार, देश की 28 राज्य इकाइयां और 42 उद्योग महासंघ एकजुट होकर सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल विरोध प्रदर्शन, रैलियां और धरने आयोजित करने का निर्णय किया था। कार्यसमिति ने जिला अधिकारियों के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपने का भी निर्णय लिया था। 
उसी तारतम्य में आज भारतीय मजदूर संघ जिला बालोद द्वारा एक दिवसीय धरना प्रदर्शन धरना स्थल बस स्टैंड बालोद में किया गया है।और सरकार को उनकी जिम्मेदारीयों को स्मरण कराया गया है। आज सुबह से हो रहें बरसात के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहियकाओं और मजदूरों ने जबरदस्त उत्साह के साथ बारिश में भीगते हुए धरना प्रदर्शन में शामिल हुए।इस धरना प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ के सभी अनुशांगिक संगठन शामिल हैं। जैसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ, खदान मजदूर संघ भिलाई, बिजली संघ, भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर संघ, राज्य कर्मचारी संघ एवं अन्य सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति थी
जिला मंत्री मुश्ताक अहमद ने बताया कि 
स्कीम वर्कर्स: *आधी सदी की उपेक्षा*
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) कर्मियों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारियों सहित एक करोड़ से अधिक स्कीम वर्कर्स के प्रति केंद्र और राज्य सरकारों के दृष्टिकोण की समीक्षा करने का समय आ गया है। सामान्यतः किसी भी सामाजिक कल्याण योजना की अवधि 10 से 12 वर्ष ही होती है। लेकिन अक्टूबर 1975 में शुरू होकर आधी सदी पूरी कर चुकी आंगनवाड़ी व्यवस्था को अब भी केवल एक "स्कीम" मानना घोर अन्याय है।
प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक कठिन परिश्रम करने वाले इन कर्मियों से शासन सभी सेवाएं सुचारू रूप से लेता है। लेकिन सरकारों द्वारा इन्हें आधिकारिक तौर पर श्रमिक का दर्जा देने या नए लेबर कोड के संरक्षण के दायरे में शामिल करने की कोई तैयारी नहीं दिखती। इस कुशल और विशाल कार्यबल का मासिक मानदेय पर्याप्त रूप से बढ़ाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ तत्काल बातचीत शुरू करनी चाहिए।
*सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन*
श्रमिकों के जीवन स्तर को उठाने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बी.एम.एस निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से आज अपने मांग पत्र में रखा है:

* पेंशन सुधार: ई.पी.एस 95 (EPS 95) के तहत न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह किया जाए। इसे परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (VDA) और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना से जोड़ा जाए। सरकारी कर्मचारियों की पुरानी मांग 'पुरानी पेंशन योजना' (OPS) को बहाल किया जाए।
* वेतन और सामाजिक सुरक्षा सीमाएं: बढ़ती जीवन लागत के अनुपात में फॉर्मूला-आधारित न्यूनतम वेतन ₹30,000 तय किया जाए। ई.एस.आई (ESI) की पात्रता सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 और ई.पी.एफ (EPF) सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 की जाए।
* बोनस और ग्रेच्युटी: नए लेबर कोड में अधिसूचित अनुसार पूरे वेतन पर बोनस घोषित किया जाए; वर्तमान ₹7,000 की बोनस गणना सीमा में समयोचित वृद्धि की जाए। बिना किसी ऊपरी सीमा के ग्रेच्युटी की गणना 15 दिनों के वेतन से बढ़ाकर 30 दिनों के वेतन के आधार पर की जाए।

* *श्रम न्याय और समानता*: सभी प्रकार के संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों के लिए 'समान कार्य के लिए समान वेतन' लागू किया जाए। वेतन का भुगतान न कर मजदूरों को धोखा देने वाले ठेकेदारों और मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

* *कार्य परिस्थितियां*: बैंकिंग क्षेत्र में 5-दिवसीय कार्यप्रणाली (5-Day Banking) को तत्काल लागू किया जाए। सभी सरकारी विभागों में खाली पड़े लाखों पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

*नीतिगत सुधार अनिवार्य*
श्रमिक विरोधी प्रावधानों वाले इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (IR Code) और ओ.एस.एच & डब्ल्यू.सी कोड (OSH&WC Code) का बी.एम.एस कड़ा विरोध करता है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ चर्चा किए बिना ऐसे कोड थोपना लोकतांत्रिक श्रम संस्कृति के अनुकूल नहीं है। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द 'भारतीय श्रम सम्मेलन' (ILC) बुलाकर ट्रेड यूनियनों के साथ खुला संवाद शुरू करना चाहिए।

विश्व में अन्यत्र कहीं न दिखने वाले इतने विशाल असंगठित कार्यबल वाले भारत में, कार्य-जगत के बदलते परिवेश के अनुरूप एक विशेष राष्ट्रीय नीति का निर्माण करना अत्यंत आवश्यक है। मजदूरों के उचित अधिकारों की रक्षा किए बिना देश समग्र आर्थिक विकास हासिल नहीं कर सकता। 17 अगस्त को सड़कों पर गूंजने वाली मजदूरों की आवाज नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है।
             इस धरना प्रदर्शन को मुख्य वक्ता मुश्ताक अहमद अंसारी के अलावा प्रदेश पर्यावरण संजोजक लखनलाल चौधरी, प्रदेश महामंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ माधुरी रथ, प्रदेश उपाध्यक्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ कुलेश्वरी साहू, राष्ट्रीय मंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ आयशा खान ने भी संबोधित किया। इस एकदिवसीय धरना प्रदर्शन में मुख्य रूप से ब्लाक अध्यक्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ श्रीमती कमला चन्द्राकार सेक्टर प्रभारी श्रीमती संजय कुमारी, श्रीमती सुनीता साहू, श्रीमती पूर्णिमा बैस, श्रीमती शांति साहू, श्रीमती चित्राणी निषाद, श्रीमती लक्ष्मी पटेल, श्रीमती कुमदीनी देशमुख, श्रीमती मिडिया प्रभारी जैबा अख्तर,संजु रामटेके,त्रिलोका लेडिया , संगीता आरदा, पिलेशवरी एवं अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ के सदस्यों की उपस्थिति थी खदान मजदूर संघ भिलाई से श्रमिकों की उपस्थिति थी 
विनीत 
मुश्ताक अहमद अंसारी 
जिला मंत्री भारतीय मजदूर संघ जिला बालोद

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