*इलाज नहीं, लूट का कारोबार? स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का बड़ा हमला*

*इलाज नहीं, लूट का कारोबार? स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का बड़ा हमला*

*इलाज नहीं, लूट का कारोबार? स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का बड़ा हमला*
*इलाज नहीं, लूट का कारोबार? स्वास्थ्य व्यवस्था पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का बड़ा हमला*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से प्रदेश के निजी अस्पतालों की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा आज सेवा कम और व्यापार अधिक बनती जा रही है।अनेक मरीजों और उनके परिजनों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि इलाज के नाम पर अनावश्यक जांच,महंगी दवाइयां,जरूरत से अधिक भर्ती तथा विभिन्न प्रकार के अतिरिक्त शुल्क लेकर गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराना था,लेकिन इस योजना का दुरुपयोग हो रहा है,केवल आयुष्मान कार्ड की पूरी सीमा (लिमिट) का लाभ लेने के उद्देश्य से अनावश्यक प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं,यह अत्यंत गंभीर विषय है ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों में पहले आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार की प्रक्रिया शुरू की जाती है और बाद में विभिन्न कारण बताकर अतिरिक्त राशि की मांग भी की जाती है।यह न केवल योजना की मूल भावना के विपरीत है बल्कि गरीब मरीजों के अधिकारों का भी हनन है।सरकार को इस विषय पर गंभीरता से जांच करानी चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवार सबसे अधिक संकट में हैं।जो लोग आयुष्मान योजना के दायरे में नहीं आते,उन्हें इलाज के दौरान कई बार अपनी वर्षों की जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ती है या कर्ज लेना पड़ता है।गंभीर बीमारी की स्थिति में पूरा परिवार आर्थिक संकट में आ जाता है।स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य लोगों को जीवन देना होना चाहिए, न कि उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ देना।उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेशभर में निजी अस्पतालों का विशेष ऑडिट कराया जाए,आयुष्मान योजना के अंतर्गत हुए उपचारों की तकनीकी जांच हो,उपचार प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा जिन अस्पतालों के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हो रही हैं,उनकी विशेषज्ञ समिति से जांच कराई जाए साथ ही मरीजों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए प्रभावी हेल्पलाइन और जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि कुछ संस्थान पूरे स्वास्थ्य क्षेत्र की छवि खराब कर रहे हैं,उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।इससे मरीजों का विश्वास भी बढ़ेगा और आयुष्मान भारत जैसी जनकल्याणकारी योजना का उद्देश्य भी सफल होगा।स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता,जवाबदेही और संवेदनशीलता सुनिश्चित करना सरकार और अस्पताल प्रबंधन की सामूहिक जिम्मेदारी है।गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को गुणवत्तापूर्ण,सुलभ और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिलें,यही किसी भी जनकल्याणकारी व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी है।

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