ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, 10 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, 10 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, 10 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

​ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, 10 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान

दल्लीराजहरा / बालोद (छ.ग.):

​केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों, क्षेत्रीय संगठनों तथा संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आज 10 अगस्त 2026 को दल्लीराजहरा में विभिन्न मजदूर व किसान संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM), दल्लीराजहरा (जिला-बालोद, छत्तीसगढ़) के माध्यम से एक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।


​यह कदम 29 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित श्रमिक एवं किसान राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित घोषणापत्र और प्रस्तावों के समर्थन में उठाया गया है।

ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख राष्ट्रीय व नीतिगत मांगें:

  1. श्रम संहिताओं को रद्द करना: चारों श्रम संहिताओं (Labour Codes) और नियमों को निरस्त कर सभी श्रमिकों के लिए ट्रेड यूनियन बनाने, सामूहिक सौदेबाजी और हड़ताल का अधिकार सुनिश्चित करना।
  2. एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी: सभी फसलों पर C2+50% के फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी देना और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
  3. न्यूनतम मजदूरी व सामाजिक सुरक्षा: सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹42,000 प्रति माह तय करना तथा मनरेगा (MGNREGA) के तहत काम के दिनों को बढ़ाकर 200 दिन एवं दैनिक मजदूरी ₹700 करना।
  4. विद्युत संशोधन विधेयक रद्द करना: विद्युत संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेना तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाना।
  5. पेंशन योजना: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करना तथा EPS-95 में वृद्धि कर सभी नागरिकों के लिए सार्वभौमिक पेंशन की व्यवस्था करना।
  6. सार्वजनिक क्षेत्र का बचाव: सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), प्राकृतिक संसाधनों, रेलवे, बैंक और बीमा क्षेत्रों के निजीकरण / विनिवेश पर रोक लगाना।
  7. पेपर लीक व बेरोजगारी पर लगाम: प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करना, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाकर रिक्त पड़े लाखों पदों पर स्थायी नियुक्तियां करना।

दल्लीराजहरा क्षेत्र की प्रमुख स्थानीय मांगें:

​ज्ञापन में दल्लीराजहरा और बालोद जिले के विकास तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए छह प्रमुख मांगें प्रमुखता से रखी गईं:

  1. 06 MT पेलेट प्लांट की स्थापना: दल्लीराजहरा क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) हेतु प्रस्तावित 06 MT पेलेट प्लांट की स्थापना दल्लीराजहरा में ही की जाए, साथ ही कृषि व वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।
  2. DMF फंड का स्थानीय विकास में उपयोग: जिला खनिज न्यास निधि (DMF) की 50% राशि का उपयोग दल्लीराजहरा व आसपास के प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में किया जाए।
  3. केंद्रीय विद्यालय व 100 बिस्तर अस्पताल: दल्लीराजहरा में केंद्रीय विद्यालय तथा 100 बिस्तरों वाले अस्पताल की अविलंब शुरुआत की जाए।
  4. जिले का नामकरण: जिले का नाम संशोधित कर 'दल्लीराजहरा-बालोद जिला' किया जाए।
  5. आवासीय पट्टा प्रदाय: दल्लीराजहरा के निवासियों को शीघ्र अति शीघ्र आवासीय पट्टा प्रदान किया जाए।
  6. छंटनी पर रोक: BSP खदानों में कार्यरत ठेका श्रमिकों की छंटनी और वेतन कटौती पर तत्काल रोक लगाई जाए।

प्रदर्शनकारी संगठनों का रुख:

​ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त खदान मजदूर संघ (AITUC), हिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉईज यूनियन (CITU), छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ, मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (INTUC), छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), तथा जिला किसान संघ / संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि व पदाधिकारी मुख्य रूप से शामिल रहे।

​प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र व राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और किसानों की इन वाजिब मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


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