*सैकड़ों गांवों के भरोसे का पोस्टमार्टम केंद्र खुद बदहाल, मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव*

*सैकड़ों गांवों के भरोसे का पोस्टमार्टम केंद्र खुद बदहाल, मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव*

*सैकड़ों गांवों के भरोसे का पोस्टमार्टम केंद्र खुद बदहाल, मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव*
रिपोर्टर रोहित वर्मा 
खरोरा 
*सैकड़ों गांवों के भरोसे का पोस्टमार्टम केंद्र खुद बदहाल, मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव*
खरोरा-
नगर पंचायत खरोरा से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर वार्ड क्रमांक 11 में स्थित पोस्टमार्टम केंद्र (चीरघर) वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। यह केंद्र खरोरा सहित आसपास के सैकड़ों गांवों के लिए एकमात्र पोस्टमार्टम केंद्र है, जहां प्रतिदिन मृतकों के परिजन, ग्रामीण, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी पहुंचते हैं। इसके बावजूद यहां आज तक आवश्यक सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो पाया है।सबसे गंभीर बात यह है कि आज़ादी के लगभग 79 वर्ष बाद भी इस महत्वपूर्ण सरकारी परिसर में पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, समुचित प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा, बाउंड्रीवाल तथा हरित परिसर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। दूर-दराज़ से आने वाले लोगों को खुले परिसर में घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।जानकारी के अनुसार, चीरघर परिसर में आज तक पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। यहां न तो बोरवेल है और न ही स्वतंत्र जल स्रोत। ऐसे में मृतकों के परिजन, पुलिसकर्मी एवं कर्मचारी पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो जाते हैं। वहीं, पोस्टमार्टम केंद्र का अपना अलग बिजली कनेक्शन और बिजली मीटर भी नहीं है। पर्याप्त रोशनी के अभाव में कार्यों के संचालन तथा वैधानिक प्रक्रिया के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।पोस्टमार्टम केंद्र तक पहुंचने के लिए किसी प्रकार का दिशा-सूचक (सांकेतिक) बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। पहली बार आने वाले लोगों, विशेषकर रात्रि के समय, चीरघर का पता लगाने में परेशानी होती है। कई बार एम्बुलेंस और मृतकों के परिजनों को भी सही स्थान तक पहुंचने में कठिनाई उठानी पड़ती है।परिसर में स्थित एक भवन जर्जर एवं क्षतिग्रस्त हो चुका है, जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसके बावजूद अब तक उसके जीर्णोद्धार अथवा पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। रात के समय पूरा परिसर अंधेरे में डूबा रहता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बनी रहती हैं।इस संबंध में रमेश शर्मा प्रदेश कार्य समिति सदस्य किसान मोर्चा का कहना है कि पोस्टमार्टम केंद्र में पक्का बाउंड्रीवाल, हाईमास्ट एवं स्ट्रीट लाइट, पेयजल के लिए बोरवेल, स्वतंत्र बिजली कनेक्शन एवं मीटर, सार्वजनिक शौचालय, प्रतीक्षारत लोगों के लिए शेड और बैठने की व्यवस्था, दिशा-सूचक बोर्ड तथा परिसर के सौंदर्यीकरण जैसी सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जानी चाहिए।यह केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, जनहित और सैकड़ों गांवों के नागरिकों की गरिमा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। शोक की घड़ी में आने वाले परिवारों को न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन तथा नगर पंचायत से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेते हुए पोस्टमार्टम केंद्र का समग्र विकास कराया जाए। साथ ही जर्जर भवन का पुनर्निर्माण, बाउंड्रीवाल, बोरवेल, स्वतंत्र बिजली कनेक्शन एवं मीटर, हाईमास्ट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था तथा दिशा-सूचक बोर्ड जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं, ताकि सैकड़ों गांवों से आने वाले लोगों को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुविधायुक्त वातावरण मिल सके।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3