*ठंडे जल से स्नान के बाद भगवान हुए 'अनसर',लग रहा जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़े का भोग*

*ठंडे जल से स्नान के बाद भगवान हुए 'अनसर',लग रहा जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़े का भोग*

*ठंडे जल से स्नान के बाद भगवान हुए 'अनसर',लग रहा जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़े का भोग*
रिपोर्टर रोहित वर्मा 
खरोरा 


*ठंडे जल से स्नान के बाद भगवान हुए 'अनसर',लग रहा जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़े का भोग*
खरोरा।
 स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री जगन्नाथ महाप्रभु को विधि-विधान से शीतल जल से महाअभिषेक (स्नान) कराया गया। परंपरा के अनुसार स्नान के उपरांत भगवान श्री जगन्नाथ जी अस्वस्थ (अनसर) हो जाते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों भगवान विश्राम कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रतिदिन औषधीय जड़ी-बूटियों से निर्मित काढ़े का भोग अर्पित किया जा रहा है।
खरोरा स्थित के श्रीबालाजी दरबार में भगवान श्री जगन्नाथ जी की विशेष सेवा-पूजा की जा रही है। इस अवधि में भगवान के दर्शन सीमित रहते हैं तथा उनकी विशेष देखभाल की जाती है। श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रहे हैं।
पंडित धनंजय शर्मा ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा जी लगभग 15 दिनों तक अनसर गृह में विराजमान रहते हैं। इस दौरान उन्हें औषधीय काढ़े, फल एवं हल्के भोग अर्पित किए जाते हैं। इसके पश्चात भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन भव्य रथयात्रा में नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करते हैं।.
उन्होंने बताया कि यह परंपरा भगवान के मानवीय स्वरूप और भक्तों के साथ उनके आत्मीय संबंध का प्रतीक मानी जाती है।

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