महाराष्ट्रीयन परंपरा सेक्टर टू हनुमान मंदिर महाराष्ट्रीयन महिलाओ के द्वारा मनाया गया वट सावित्री का पर्व प्रति वर्ष की भाती उषा क्षीरसागर मे बतायावट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है।

महाराष्ट्रीयन परंपरा सेक्टर टू हनुमान मंदिर महाराष्ट्रीयन महिलाओ के द्वारा मनाया गया वट सावित्री का पर्व प्रति वर्ष की भाती उषा क्षीरसागर मे बतायावट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है।

महाराष्ट्रीयन परंपरा सेक्टर टू हनुमान मंदिर महाराष्ट्रीयन महिलाओ के द्वारा मनाया गया वट सावित्री का पर्व प्रति वर्ष की भाती उषा क्षीरसागर मे बतायावट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है।
महाराष्ट्रीयन परंपरा सेक्टर टू हनुमान मंदिर महाराष्ट्रीयन महिलाओ के द्वारा मनाया गया वट सावित्री का पर्व प्रति वर्ष की भाती उषा क्षीरसागर मे बतायावट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। 
यह व्रत अखंड सौभाग्य का वरदान देने वाला माना जाता है।
## तिथि और मनाने का समय
यह व्रत भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में दो तिथियों पर मनाया जाता है:

* उत्तर भारत में: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में यह ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाता है।
* पश्चिम और दक्षिण भारत में: महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में इसे ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जिसे 'वट पूर्णिमा' भी कहते हैं।
## वट (बरगद) वृक्ष का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है। बरगद का पेड़ बहुत लंबी आयु तक जीवित रहता है, इसलिए इसे अमरता का प्रतीक मानकर पूजा जाता है ताकि पति को भी दीर्घायु प्राप्त हो।
## संक्षिप्त व्रत कथा
यह व्रत सावित्री और सत्यवान की अमर कथा पर आधारित है। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तो सावित्री अपने पतिव्रता धर्म और बुद्धिमत्ता के बल पर उनके पीछे चल पड़ीं। उन्होंने यमराज से चतुराई से सौ पुत्रों की माता बनने का वरदान मांग लिया। वचनबद्ध होने के कारण यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। यह घटना बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी, इसलिए इस वृक्ष की पूजा की जाती है।
## पूजा की सरल विधि
   1. श्रृंगार: महिलाएं सुबह स्नान करके नए वस्त्र पहनती हैं और पूरा श्रृंगार करती हैं।
   2. जल और भोग: बरगद के पेड़ की जड़ में जल अर्पित किया जाता है और रोली, अक्षत, भीगे चने तथा फल चढ़ाए जाते हैं।
   3. परिक्रमा: सूत के कच्चे धागे को बरगद के पेड़ के चारों ओर लपेटते हुए फेरे (परिक्रमा) लगाए जाते हैं।
   4. कथा और दान: परिक्रमा के बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है। पूजा के बाद बांस के पंखे और सुहाग सामग्री का दान करके बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है। . वट सावित्री हे पूजा के अवसर पर महाराष्ट्रीयन परंपरा सभी सभी महिलाओ के द्वारा पूजा अर्चना आम का प्रसाद वट पूजा सात फेरे धागो से बांध कर हळदी कुमकुम सिंगार भेट किया गया सभी को बधाई शुभकामनाये दि इस अवसर पर उषा क्षीरसागर चारू टल्लू ताई सुषमा कोल्हे चित्रा बरणे मोनिका ला खे समस्त महिला उपस्थित थी

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