*धान सुखत का ठीकरा सिर्फ समिति प्रबंधकों पर क्यों – डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से दुर्ग जिले की सेवा सहकारी समितियों में धान सुखत को लेकर समिति प्रबंधकों पर की जा रही अन्यायपूर्ण कार्यवाही पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेने का आग्रह किया है।भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि धान सुखत और उठाव में देरी के लिए केवल समिति प्रबंधकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।प्रशासन को समग्र रूप से जांच कर वास्तविक जिम्मेदारी तय करनी चाहिए,ताकि सहकारी संस्थाओं और किसानों का विश्वास बना रहे।धान खरीदी,भंडारण,उठाव और भुगतान की पूरी जिम्मेदारी एक बहु-विभागीय प्रक्रिया है।इसमें विपणन एवं खाद्य विभाग,जिला सहकारी केंद्रीय बैंक,जिला प्रशासन,खाद्य अधिकारी और अन्य संबंधित एजेंसियां समान रूप से उत्तरदायी हैं।केवल समिति प्रबंधकों पर लाखों रुपये की रिकवरी थोपना और उन्हें बदनाम करना न्यायोचित नहीं है।धान खरीदी नवंबर माह में शुरू हुई,लेकिन कई समितियों में उठाव दिसंबर-जनवरी तक नहीं हो सका।भंडारण की कमी,परिवहन की व्यवस्था न होना और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं विभागीय स्तर पर रही हैं।समिति प्रबंधक किसानों की सेवा के लिए काम करते हैं।वे न तो गोदामों के मालिक हैं और न ही उठाव की पूरी जिम्मेदारी उनकी है।जब ऊपरी स्तर पर नीतिगत निर्णय,पर्याप्त गोदाम,समय पर परिवहन और भुगतान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विपणन एवं खाद्य विभाग तथा प्रशासन की है तो केवल ग्रामीण स्तर के प्रबंधकों को बलि का बकरा बनाना उचित नहीं है।यह किसानों के हितों के साथ भी खिलवाड़ है क्योंकि समितियां ही किसानों के सबसे निकट का माध्यम हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आग्रह किया कि समिति प्रबंधकों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई वास्तविक अनियमितता है तो उसके साथ-साथ विभागीय अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए।धान उठाव में हुई देरी के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।समिति प्रबंधकों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी से मुक्त किया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समन्वय समिति बनाई जाए जिसमें सभी संबंधित विभागों के अधिकारी और समिति प्रतिनिधि शामिल हों।