*छत्तीसगढ़ का लाडला अशोक धीवर का इंदौर में सम्मान*

*छत्तीसगढ़ का लाडला अशोक धीवर का इंदौर में सम्मान*

*छत्तीसगढ़ का लाडला अशोक धीवर का इंदौर में सम्मान*
तिल्दा नेवरा।
दिलीप वर्मा 
9424211900

*छत्तीसगढ़ का लाडला अशोक धीवर का इंदौर में सम्मान*
बहुमुखी प्रतिभा के धनी, जनसेवा, समाज सेवा, साहित्य सेवा,भाषा संरक्षण हेतु प्रयासरत, धर्म तथा संस्कृति रक्षण, पर्यावरण संरक्षण, बाल संस्कार केन्द्र, युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार हेतु प्रेरित करने वाले "हर्षिता जन सेवा फाउंडेशन" के डायरेक्टर अशोक धीवर "जलक्षत्री" को इंदौर (मध्यप्रदेश) में आयोजित भव्य समारोह इम्पैक्ट इंडिया सम्मिट 2026 में श्रेष्ठ NGO सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के प्रख्यात पद्मश्री से सम्मानित व्यक्ति श्री सुशील दोषी (भारत के प्रथम हिंदी क्रिकेट कमेंटेटर) तथा इम्पैक्ट इंडिया सम्मिट के संस्थापिका ज्योति कुमारी के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया। ज्ञात हो कि रायपुर (छत्तीसगढ़) के ग्राम- तुलसी (तिल्दा-नेवरा) के निवासी श्री धीवर जी पेशे से पेंटर, मूर्तिकार एवं साहित्यकार हैं। जो कि छ: वर्ष पूर्व एक एक्सीडेंट में उसका पैर चोटिल हो गया था। घुटने से आंशिक अपाहिज के रूप में बिस्तर पर लेटे लेटे सोचता कि किसी भी एक्सीडेंट में लोग प्रायः मर जाया करते हैं। किंतु मैं जीवित बच गया हूं। इसका कुछ विशेष कारण अवश्य होगा। परमात्मा ने मुझसे कुछ अहम कार्य करवाने के लिए ही बचाया है। बस इसी सोच ने मेरी जिंदगी में जन सेवा करने का रास्ता बना दिया। आज उसी सेवा का परिणाम है कि राष्ट्रीय पुरस्कार श्रेष्ठ NGO सम्मान से नवाजा गया।
              गौरतलब हो कि श्री धीवर जी समाज सेवा का सशक्त उदाहरण है। समाज में प्रताड़ित व शोषित लोगों को यथोचित न्याय, सम्मान व अधिकार दिलाने का महती भूमिका निभाते हैं। अलगाव पति-पत्नी में सुलह तथा समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों, कमजोरियों और बुराईयों को दूर करने का सतत् प्रयास करते हैं। उनका समाज के प्रति समर्पण व निरंतर सेवा भाव सचमुच एक प्रेरणाप्रद कार्य है। वे एक विलक्षण नेतृत्व क्षमतावान एवं निर्भिक सत्यभाषण करने वाले व्यक्ति हैं। बच्चों को संस्कार देने के लिए सतत् बाल संस्कार केन्द्र का संचालन करते हैं।
 साहित्यकार होने के नाते बहुत से ऐसे लोगों को कविता लिखना सिखाते हैं, जिन्हें लिखने की इच्छा तो है परन्तु कविता लिखना जानते नहीं हैं। अपने राष्ट्रीय स्तर की साझा साहित्य संग्रह में स्थान देकर उनकी रचनाओं को छापकर हौसला अफजाई करते हैं। आज के दौर में लोग अपनी खुद की पुस्तक छपवा कर वाहवाही लूटते रहते हैं, ऐसे में श्री धीवर जी ने सबको अपने साथ लेकर निस्वार्थ साहित्य सेवा करने का दुष्कर कार्य किया है। जिसका मूल्यांकन आज हो रहा है और नेशनल अवार्ड - 2026 "परम विभूषण सेवा रत्न सम्मान" से सम्मानित हो रहे हैं। नशा मुक्त, शाकाहारी और आध्यात्मिक चेतना का प्रचार प्रसार करते रहते हैं। कहते हैं ना कि जब कोई व्यक्ति वर्षों से बिना शोर किए जन सेवा करते रहते हैं। अपने नेक कार्यों का बखान न करके केवल अपनी योग्यतानुसार सेवा करता रहता है। ऐसे व्यक्ति का सम्मान की तैयारी भी खुद ब खुद प्रकृति द्वारा होने लगता है।

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