*समस्या टैंकर ही इकलौता सहारा*
*मुरा गांव में भीषण जलसंकट तीन हजार की आबादी पानी को तरस रही है **
खरोरा
गर्मी की दस्तक के साथ ही समीपस्थ ग्राम मूरा में जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। गांव में पीने के पानी के लिए 'हाय-तौबा' मची हुई है। आलम यह है कि 3 हजार से अधिक की आबादी वाला यह गांव बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। उल्लेखनीय है कि जलस्तर का नीचे जाना यहां की हर साल की समस्या है, लेकिन इस बार हालात और भी बदतर हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जल प्रदाय के लिए 5 पानी की टंकियां और बोरवेल्स लगाए गए थे, लेकिन भीषण गर्मी के चलते सभी टंकियां पूरी तरह सूख चुकी हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि ग्रामीणों के निजी घरेलू और कृषि कार्य के लिए उपयोग होने वाले नलकूप भी जवाब दे गए हैं। गांव में लगे हैंडपंप या तो बंद पड़े हैं या उनसे पानी नहीं निकल रहा। सरकारी दावों की पोल खोलती 'नल-जल योजना' पानी के अभाव में पूरी तरह दम तोड़ चुकी है।
*पत्थर खदान से टैंकरों के जरिए हो रही आपूर्तिः** **आबादी की प्यास बुझाने के लिए ग्राम पंचायत मूरा ने मोर्चा संभाला है। पंचायत द्वारा 3 नग पानी टैंकर लगाए गए हैं, जो पत्थर खदान से पानी भरकर ला रहे हैं और बस्ती में आपूर्ति की जा रही है। पंचायत का यह प्रयास
फिलहाल ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा बना हुआ है , लेकिन 3 हजार की आबादी के लिए यह पर्याप्त नहीं है।
*पड़ोसी गांवों में पर्याप्त पानी, मुरा में किल्लत क्यों?*
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बंगोली अंचल के अन्य गांवों जैसे
बंगोली, कुर्रा और धनसुली में पीने के साफ पानी की पर्याप्त उपलब्धता है, जबकि पूरा गांव जल संकट से जूझ रहा है। यह बड़ा सवाल है कि अन्य गांव पानी की समस्या से सुरक्षित हैं, तो मुरा गांव की सुध क्यों नहीं ली जा रही? ग्रामीणों का कहना
है कि यह हर साल की समस्या है, इसके बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा रहा है। शासन-प्रशासन को इस ओर ध्यान देकर स्थाई उपाय करने की आवश्यकता है, ताकि हर साल ग्रामीणों को पानी के लिए इस तरह दर-दर न भटकना
श्री रोहित वर्मा जी की खबर