*शैक्षणिक भ्रमण से समृद्ध हुए विद्यार्थियों के अनुभव: बस्तर की प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर से परिचय*
*शैक्षणिक भ्रमण से समृद्ध हुए विद्यार्थियों के अनुभव: बस्तर की प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर से परिचय*
खरोरा 12 अप्रैल 2026:- पीएम श्री भरत देवांगन शासकीय उत्कृष्ट हिंदी/अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खरोरा के छात्र-छात्राओं ने बस्तर अंचल के प्रसिद्ध पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों ने तीरथगढ़ जलप्रपात, बारसूर गणेश मंदिर, चित्रकूट जलप्रपात, कुटुमसार गुफा तथा दंतेश्वरी मंदिर जैसे ऐतिहासिक, प्राकृतिक एवं धार्मिक महत्व के स्थलों का अवलोकन किया।
इस शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक एवं सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करना था। भ्रमण के दौरान छात्रों ने बस्तर की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता तथा समृद्ध आदिवासी संस्कृति को निकट से समझा।
*प्राकृतिक सौंदर्य और ज्ञान का संगम*
तीरथगढ़ एवं चित्रकूट जलप्रपात की मनोहारी छटा ने विद्यार्थियों को अत्यंत आकर्षित किया। जलप्रपातों की विशालता और प्राकृतिक परिवेश ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया। वहीं कुटुमसार गुफा की रहस्यमयी संरचना और भूगर्भीय विशेषताओं ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ाया।
बारसूर गणेश मंदिर, जो प्राचीन काल में नागवंशीय शासकों की राजधानी रहा है, अपनी ऐतिहासिक धरोहरों एवं अद्भुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित गणेश मंदिर अपनी विशाल एवं आकर्षक गणेश प्रतिमा के कारण विशेष महत्व रखता है, जो विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं इतिहास से जोड़ने का कार्य किया।
दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन के दौरान छात्रों ने क्षेत्र की धार्मिक आस्था एवं परंपराओं को समझा। यह अनुभव उनके नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास में सहायक सिद्ध हुआ।
*प्राचार्य का प्रेरणादायक उद्बोधन*
विद्यालय की प्राचार्य रजनी मिंज ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि कक्षा के बाहर प्राप्त अनुभव जीवनपर्यंत स्मरणीय रहते हैं और विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन एवं टीम भावना का विकास करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि “बस्तर जैसे क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत से परिचय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ता है और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।”
*वरिष्ठ व्याख्याताओं के विचार*
वरिष्ठ व्याख्याता शाहिना परवीन ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत पाठशाला सिद्ध हुआ, जहां उन्होंने प्रकृति, इतिहास और संस्कृति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया। उन्होंने छात्रों को ऐसे अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने की प्रेरणा दी।
सेवानिवृत्त व्याख्याता डोमार सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं, बल्कि जीवन के विविध आयामों को समझना है। उन्होंने इस भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक बताया।
श्री रोहित वर्मा जी की खबर