अक्षय तृतीया के अवसर पर दुर्गा मंदिर में भगवान श्री विष्णु जी के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जी का प्रगटोत्सव बनाया गया जिसमें विशेष पूजा अर्चना आरती का आयोजन हुआ
अक्षय तृतीया के अवसर पर दुर्गा मंदिर में भगवान श्री विष्णु जी के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जी का प्रगटोत्सव बनाया गया जिसमें विशेष पूजा अर्चना आरती का आयोजन हुआ
दुर्ग: हर वर्ष कि भांति इस वर्ष भी अक्षय तृतीया के अवसर पर श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर गंजपारा में भगवान श्री विष्णु जी के छठे अवतार ब्राह्मणों के आराध्य देव भगवान श्री परशुराम जी का प्रगटोत्सव बनाया गया जिसमें विशेष विशेष पूजा अर्चना के साथ आरती का आयोजन हुआ
समिति के मोनू शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में श्री सत्ती चौरा मां दुर्गा के मुख्य पुजारी पंडित सुनील पांडे ने मंदिर परिसर में प्रातः 11 बजे भगवान श्री परशुराम जी की सक्षिप्त कथा का व्यख्यान किया और संगीतमय परशुराम चालीसा का पाठ किया, दोपहर 12 के श्री परशुराम जी की महाआरती की गई जिसमें सभी उपस्थित धर्मप्रेमीयों ने अपने हाथों से परशुराम जी की आरती किए
पंडित सुनील पांडे जी ने परशुराम जी की संक्षिप्त कथा का वर्णन करते हुए बताया कि परशुराम जी कि इनकी कृपा से जीवन की कई बड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं. परशुराम जी को अमरत्व यानी चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है, इसलिए इनकी पूजा का परिणाम जल्द प्राप्त होता है.
पंडित सुनील पाण्डेय ने बताया कि परशुराम जी के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं. संतान प्राप्ति के लिए दोनों ने कठोर तप और एक विशेष यज्ञ किया. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर इंद्र देव ने उन्हें तेजस्वी पुत्र का आशीर्वाद दिया. इसी वरदान के फलस्वरूप अक्षय तृतीया के पावन दिन उनका जन्म हुआ. जन्म के समय उनका नाम “राम” रखा गया. परशुराम की प्रारंभिक शिक्षा इनके दादा ऋचिकऔर पिता जमदग्नि से प्राप्त हुई.
बालक राम ने बचपन से ही अद्भुत पराक्रम और तेज का परिचय दिया. उनकी साधना और समर्पण से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपना दिव्य अस्त्र परशु (फरसा) प्रदान किया, साथ ही चिरंजीवी होने का वरदान भी दिया. यही वह क्षण था जब राम परशुराम के नाम से प्रसिद्ध हुए. एक ऐसे योद्धा, जिनका हर कार्य धर्म की रक्षा के लिए था.
"शस्त्र और शास्त्र का संतुलन"
परशुराम जी एक ब्राह्मण होते हुए भी योद्धा थे. जो ज्ञान और पराक्रम के संगम का प्रतीक है. उनके जीवन से हमें यह सीख मिलती है सिर्फ शारीरिक शक्ति नहीं बल्कि जीवन में तरक्की के लिए ज्ञान की भी जरुरत होती है. शक्ति का उपयोग सदैव समाज के कल्याण और अन्याय को मिटाने के लिए होना चाहिए न कि किसी का अहित करने के लिए. यह निडर ब्राह्मण योद्धा उन क्षत्रियों को दंड देने के लिए जाने जाते हैं, जिन्होंने अत्याचार किए और इसलिए यह दिन हिंदुओं के लिए खास धार्मिक महत्व रखता है. कार्यक्रम में चारों वेदों और शस्त्रों की पूजा भी की गई।
परशुराम जी की पूजा अर्चना के साथ साथ मंदिर परिसर में अक्षय तृतीया (अक्ति) पर छत्तीसगढ़ की परम्परा अनुसार मिट्टी के गुड्डा-गुड्डी (पुतरा-पुतरी) की शादी भी कराई गई जो सुख-समृद्धि और बच्चों में संस्कारों के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
कार्यक्रम में गोपाल शर्मा नरेंद्र शर्मा घनश्याम पंड्या राजेंद्र शर्मा चंदू शर्मा प्रमोद जोशी प्रतिभा सुरेश गुप्ता कमल शर्मा जीतू शर्मा राहुल शर्मा ललित शर्मा राजू पुरोहित राजेश शर्मा निर्मल शर्मा प्रशांत कश्यप घनश्याम बंद्रा गोपाल शर्मा अधिवक्ता तरुण पांडे ईशान शर्मा चंचल संजय शर्मा आभा गोपाल शर्मा चंचल ललित शर्मा सुमन बंटी शर्मा मुस्कान शर्मा कृष्णा शर्मा सार्थक शर्मा मोक्ष शर्मा राम शर्मा हृदय शर्मा उपस्थित हुए..