कांग्रेस की 'नक्सल पोषित' राजनीति का अंत: मोदी सरकार ने बस्तर के माथे से मिटाया कलंक — श्याम जायसवाल
कांग्रेस की 'नक्सल पोषित' राजनीति का अंत: मोदी सरकार ने बस्तर के माथे से मिटाया कलंक — श्याम जायसवाल
दल्लीराजहरा/ बालोद:- भारत को आधिकारिक तौर पर 'नक्सल मुक्त' घोषित किए जाने के ऐतिहासिक अवसर पर भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिला अध्यक्ष श्याम जायसवाल ने कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की मुक्ति उन कांग्रेसी चेहरों की सबसे बड़ी हार है, जिन्होंने दशकों तक नक्सलियों को अपना 'वैचारिक और राजनीतिक कवच' प्रदान किया।
नक्सलियों के 'राष्ट्रीय और प्रादेशिक संरक्षकों' का पर्दाफाश:
श्याम जायसवाल ने कड़े लहजे में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, "देश भूला नहीं है कि कैसे राहुल गांधी ने जेएनयू जाकर उस 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का समर्थन किया जो जवानों की शहादत पर जश्न मनाते थे। दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं ने हमेशा नक्सलियों को 'भटके हुए मुसाफिर' बताकर उनका महिमामंडन किया। पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम और जयराम रमेश जैसे नेताओं ने 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के समय सुरक्षा बलों के हाथ बाँधने का काम किया और नक्सलियों के मानवाधिकारों की चिंता की, जबकि हमारे जवानो के शहिद होने पर इनका मुंह सील जाता था। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार के दौरान भी यही 'नरम रुख' जारी रहा, जहाँ नक्सलियों को संवाद के नाम पर केवल समय और संरक्षण दिया गया। भूपेश बघेल ने हमेशा उन 'अर्बन नक्सलियों' को वैचारिक कवच प्रदान किया जो रायपुर और दिल्ली में बैठकर बस्तर को लहूलुहान करने की साजिश रचते थे।"
शहीद महेंद्र कर्मा का अपमान और षड्यंत्र:
जिला अध्यक्ष ने भावुक और आक्रोशित होते हुए कहा, "बस्तर टाइगर स्व. महेंद्र कर्मा जी जैसे जननायक, जो सभी दलों के लिए आदर्श थे, उनका राष्ट्रवाद दिल्ली की कांग्रेस को कभी नहीं पचा। दिल्ली के इन्हीं नक्सल प्रेमी नेताओं ने कर्मा जी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया और उन्हें नक्सलियों के रहमों-करम पर छोड़ दिया। झीरम घाटी में शहीद महेंद्र कर्मा, शहीद विद्याचरण शुक्ल और शहीद नंदकुमार पटेल जैसे नेताओं की शहादत कांग्रेस की इसी 'दोगली नीति' और षड्यंत्र का परिणाम थी। जिस पार्टी ने अपने ही बलिदानियों का सम्मान नहीं किया, वह देश की रक्षा क्या करती?"
मोदी-शाह का 'काल' और विकास का 'बुलडोजर':
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने वह कर दिखाया जो कांग्रेस 60 साल में नहीं कर पाई। बस्तर में नक्सलियों के स्मारकों को बुलडोजर से जमींदोज करना यह दर्शाता है कि अब भारत की धरती पर देशद्रोहियों की पूजा नहीं होगी। पिछले 3 सालों में हजारों नक्सलियों का आत्मसमर्पण भाजपा की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है।"
विष्णुदेव साय सरकार का निर्णायक प्रहार:
श्याम जायसवाल ने छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ जो 'आर-पार' की लड़ाई लड़ी, उसी का परिणाम है कि आज अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों से भी नक्सलवाद का सफाया हो गया है। साय सरकार ने न केवल नक्सलियों को करारा जवाब दिया, बल्कि उनके द्वारा स्थापित आतंक के प्रतीकों और स्मारकों पर बुलडोजर चलाकर यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ में अब केवल कानून का राज चलेगा। गृह मंत्री विजय शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में सुरक्षा बलों को जो खुली छूट मिली, उसने नक्सलियों के हौसले पस्त कर दिए।"
पिछड़ा वर्ग की आवाज:
अंत में श्याम जायसवाल ने कहा, "बालोद जिला और पूरे छत्तीसगढ़ का पिछड़ा वर्ग समाज आज गौरवान्वित है। भूपेश बघेल और कांग्रेस ने हमें केवल डराकर रखा था, लेकिन भाजपा ने हमें आजादी दी है। कांग्रेस के नेता अब प्रदेश की जनता से माफी मांगें, क्योंकि उनकी खूनी राजनीति का अंत हो चुका है।"