आओ होली गाओ फाग, प्रेम अमृत बरसे अनुराग। खिलते हैं टेसू के फूल, चुन लो पथ से सारे शूल।। सदा प्रकृति ने दी उपहार, आया है फागुन त्यौहार। आई होली गाओ फाग, बदलो किस्मत अब जन जाग।।
शीर्षक: आओ होली गाओ फाग
आओ होली गाओ फाग, प्रेम अमृत बरसे अनुराग। खिलते हैं टेसू के फूल, चुन लो पथ से सारे शूल।। सदा प्रकृति ने दी उपहार, आया है फागुन त्यौहार।
आई होली गाओ फाग, बदलो किस्मत अब जन जाग।।
हरा गुलाबी नीला लाल, पीला नारंगी है गाल।
नाचे गाए झूमें साथ, रंग लगा लो कोमल हाथ।। विपदा का हो कुटिल प्रहार, दु:ख दर्द से उठ संसार ।
आओ होली गाओ फाग, जीवन न्यारा प्यारा राग।
सब का नैया करते पार, गुरुवर प्रभुवर पालनहार।।
प्रेम सिखाता है यह पर्व, मिल जुल कर सब करते गर्व।
आई होली गाओ फाग, बैर भाव का कर दो त्याग।।
नहीं किसी से रखे दुराव, न हो किसी से कटु का भाव।
राग द्वेष सब त्यागो आज, अंतर्मन में कर लो राज।।
रंगों की होती बौछार, खुशियों का है यह त्यौहार।
आई होली गाओ फाग, जीवन है सुंदर-सा राग।
आओ तन मन रंगों मीत, होली है दुनिया की रीत।
बाजे ढोल मंजीरा झाँझ, नाचो गाओ बिहनिया साँझ।।
हिय में भर-भर कर उल्लास, संस्कृति में रखते विश्वास।।
आई होली गाओ फाग, सबसे मिलता है अनुराग।।
उर में बसी मिलन की चाह, मौसम ने अब बदली राह।
दहन कर निज कलुषित भाव, दिव्य ज्योति का प्रबल प्रभाव।।
श्रवण धरो अब गुरु की बात, प्रेम रंग की कर बरसात।
आई होली गाओ फाग, रंगो संग सजाओ भाग।।
धर्मेंद्र कुमार श्रवण शिक्षाश्री
बालोद छत्तीसगढ़