एक जीवंत संवाद और समाज को जोड़ने वाला मंच. 27 मार्च 2026 आंतरराष्ट्रीय रंगमंच दिवस प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कीरंगमंच एक जीवंत कला है, जो कलाकार और दर्शक के बीच वास्तविक संवाद स्थापित करता है। यह समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

एक जीवंत संवाद और समाज को जोड़ने वाला मंच. 27 मार्च 2026 आंतरराष्ट्रीय रंगमंच दिवस प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कीरंगमंच एक जीवंत कला है, जो कलाकार और दर्शक के बीच वास्तविक संवाद स्थापित करता है। यह समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है।

एक जीवंत संवाद और समाज को जोड़ने वाला मंच. 27 मार्च 2026 आंतरराष्ट्रीय रंगमंच दिवस प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कीरंगमंच एक जीवंत कला है, जो कलाकार और दर्शक के बीच वास्तविक संवाद स्थापित करता है। यह समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है।
एक जीवंत संवाद और समाज को जोड़ने वाला मंच. 27 मार्च 2026 आंतरराष्ट्रीय रंगमंच दिवस प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया की
रंगमंच एक जीवंत कला है, जो कलाकार और दर्शक के बीच वास्तविक संवाद स्थापित करता है। यह समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है।


‘थियेटर की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें कलाकार और दर्शक एक ही समय और एक ही स्थान पर उपस्थित होते हैं, जिससे यह सबसे जीवंत और मानवीय संवाद का जरिया बनता है।’ -अमेरिकी अभिनेता और रंगकर्मी विलियम डेफो, जिन्हें साल 2026 के लिए ‘विश्व रंगमंच संदेश’ के हेतु चुना गया है।हर साल 27 मार्च को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल कलाकारों का उत्सव नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के उस मंच का सम्मान है, जिसने सदियों से मनुष्य की खुशियों, दुखों, संघर्षों और सपनों को अभिव्यक्ति दी है। रंगमंच की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह अकेले में या कैमरे के सामने नहीं घटित होता, बल्कि जीवित लोगों के जीवंत अहसासों के बीच घटित होता है। इसमें प्रत्यक्ष और बिना किसी कृत्रिम आडंबर के कलाकार और आम लोगों के बीच जीवंत संवाद होता है। आज जब मनोरंजन के असंख्य डिजिटल माध्यम मौजूद हैं, तब भी रंगमंच का महत्व राई मात्र भी कम नहीं हुआ। आखिर इसका कारण क्या है? इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि थियेटर केवल कहानी सुनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कलाकार और दर्शकों के बीच सीधे जीवंत संवाद की प्रक्रिया है। मंच पर घटने वाली हर घटना उसी क्षण पैदा होती है और उसी क्षण दर्शकों के साथ साझा होती है। यही कारण है कि अन्य किसी भी मंच के इतर रंगमंच को सबसे जीवंत मंच माना जाता है। इसलिए यह 21वीं शताब्दी में भी उतना ही प्रासंगिक और उतना ही व्यापक है, जितना 15वीं, 16वीं और 19वीं तथा 20वीं शताब्दी में हुआ करता था।


अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच के लिए 27 मार्च इसलिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि साल 1961 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में सांस्कृतिक संवाद की भारी आवश्यकता को इसी दिन एक अंतर्राष्ट्रीय मंच मिला था। 27 मार्च, 1962 को पेरिस में थियेटर ऑफ नेशंस नामक एक अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव का उद्घाटन हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से लगातार यह महसूस किया जा रहा था कि दो भयानक विश्व युद्धों से दुनिया में कला और संस्कृति का जो रेगिस्तान पैदा हुआ है, उसे अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच के साझे प्रयासों से ही मानवीय संवेदना के हरे-भरे परिदृश्य में बदला जा सकता है। 1961 में इस सबकी योजना बनी, दुनियाभर के कलाकारों, रंगकर्मियों और दर्शकों को एक साझा मंच देने की बात तय हुई और फिर इस तय मकसद को व्यावहारिक रूप मिला, पेरिस में 27 मार्च, 1962 को। तब से हर साल 27 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच दिवस मनाए जाने की परंपरा है। इस दिन दुनिया का कोई चुना हुआ सम्मानित रंगकर्मी ‘विश्व रंगमंच संदेश’ जारी करता है, यह संदेश दुनियाभर के थियेटर समूहों में पढ़ा जाता है और विभिन्न भाषाओं में उसका अनुवाद किया जाता है।कलाकार प्रशांत कुमार क्षीरसागर अपने विचार साजा करते हुए बताया की
 आज है विश्व रंगमंच ...27 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व रंगमंच दिवस 2026 की थीम "रंगमंच और शांति की संस्कृति" है। यह विषय कला के माध्यम से समाज में संवाद, समझ और सद्भाव को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। 

मुख्य विवरण:
उद्देश्य: रंगमंच कला के महत्व को उजागर करना और कलाकारों को सम्मानित करना।
आयोजक: इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट 
विशेषता: इस दिन एक प्रसिद्ध रंगमंच कलाकार विश्व संदेश देता है। 

यह दिवस समाज में रंगमंच की भूमिका और सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।

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