॥ जय श्री केदार: बाबा के भक्तों के लिए मंगलकारी सूचना ॥ 🚩
शिव भक्तों की प्रतीक्षा समाप्त हुई! 🔱 हिमालय की गोद में विराजमान द्वादश (12) ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की पावन तिथि की विधिवत घोषणा हो चुकी है। 🏔️
आज महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के बाद इस यात्रा वर्ष 2026 का कार्यक्रम तय किया गया है। 🌸✨
🗓️ मुख्य कार्यक्रम: बाबा की डोली का प्रस्थान मार्ग
भगवान केदारनाथ की 'उत्सव डोली' अपने शीतकालीन प्रवास से धाम की ओर प्रस्थान करेगी। 🚶♂️👣
18 अप्रैल 2026: श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में सायंकालीन आरती के पश्चात भैरवनाथ पूजा सम्पन्न होगी। 🔥
19 अप्रैल 2026: उत्सव डोली उखीमठ से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम हेतु फाटा पहुंचेगी। 🏠
20 अप्रैल 2026: डोली फाटा से चलकर रात्रि विश्राम हेतु गौरीकुण्ड पहुंचेगी। ♨️
21 अप्रैल 2026: डोली गौरीकुण्ड से प्रस्थान कर संध्या तक श्री केदारनाथ धाम पहुंचेगी। 🚩
✨ कपाट खुलने का मुहूर्त
📅 22 अप्रैल 2026, प्रातः 8:00 बजे
वृष लग्न के पावन मुहूर्त पर, वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट सभी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। 🔔🙌
आयोजन की गरिमा: यह महत्वपूर्ण निर्णय श्री केदारनाथ जी के पूज्य रावल जी, स्थानीय पुजारियों और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में लिया गया है। 🤝📜
श्रद्धालुओं से अपील:
समस्त शिव भक्तों को सूचित किया जाता है कि वे इस पावन तिथि के अनुसार अपनी केदारनाथ धाम यात्रा की योजना बनाएं और बाबा केदार के दर्शन कर पुण्य के भागी बनें। श्री शिवाय नमोस्तुभ्यम जय भोलेनाथ जय शिव शंभू नाथ
हर-हर महादेव! जय केदार!
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, पर्यावरण प्रकृती प्रेमी प्रशांत कुमार क्षीरसागर विचार साझा करते हुए बताया उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर हिमालय की गोद में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ऊँचा (3,583 मीटर) और प्रमुख है। यह मंदिर भगवान शिव के 'केदार' रूप को समर्पित है, जहाँ पांडवों को बैल रूपी शिव के कूबड़ के रूप में दर्शन हुए थे। इसे मोक्ष का द्वार माना जाता है और मान्यता है पर्यावरण प्रकती प्रेमी शिवभक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागरकेदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में मंदाकिनी नदी के तट पर 3,584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित भगवान शिव का सर्वोच्च धाम है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक (एकादश ज्योतिर्लिंग) और सबसे प्रमुख है। इसे महाभारत काल में पांडवों द्वारा निर्मित माना जाता है, जहाँ शिवलिंग स्वयंभू (प्राकृतिक) रूप में एक ऊँचे त्रिकोणीय पाषाण के रूप में पूजे जाते हैं।