🕉️ *फाल्गुन महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 – संक्षिप्त पूजन विधि, चार प्रहर समय-सारणी* 🕉️शिवभक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर
🕉️ *फाल्गुन महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 – संक्षिप्त पूजन विधि, चार प्रहर समय-सारणी* 🕉️
शिवभक्त प्रशांत कुमार क्षीरसागर
महाशिवरात्रि सनातन धर्म का अत्यंत पावन और रहस्यमय पर्व है, जो भगवान शिव के निराकार से साकार प्राकट्य और शिवत्व की अनुभूति का महाउत्सव है। यह वह दिव्य रात्रि है जब साधक जप, तप, ध्यान और अभिषेक द्वारा अपने अंत:करण को शुद्ध कर शिव तत्व के समीप पहुँचता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि की *चतुर्दशी तिथि* 15 फ़रवरी 2026 को सायं 5 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर *16 फ़रवरी 2026 को सायं 5 बजकर 34 मिनट तक* रहेगी। इस पावन अवसर पर रात्रि के चारों प्रहरों में विधिवत पूजन, अभिषेक और मंत्र जप का विशेष महत्व है।
सभी शिवभक्तों से निवेदन है कि यदि पूजन की सभी सामग्री उपलब्ध न हो तो जो भी सुलभ हो, उसी श्रद्धा और शुद्ध भाव से पूजन करें, क्योंकि *शिव साधना में बाह्य साधनों से अधिक आंतरिक भावना का महत्व* है। भाव ही सर्वोपरि है।
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त या स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव का पंचोपचार पूजन किया जाए जिसमें गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इसके पश्चात् विधिवत शिवरात्रि व्रत का संकल्प लिया जाए। संकल्प में स्पष्ट कहा जाए कि साधक जलाहार, फलाहार या निराहार में से किस प्रकार व्रत का पालन करेगा तथा किस विशेष कामना या आध्यात्मिक उद्देश्य से यह साधना कर रहा है।
दिनभर शिव नाम का स्मरण, भजन, रुद्रपाठ या *“ॐ नमः शिवाय”* मंत्र का जप करते रहना श्रेयस्कर है।
सायंकाल पुनः स्नान या आचमन कर भगवान शिव का पंचोपचार पूजन करें और रात्रि जागरण की तैयारी करें। महाशिवरात्रि की रात्रि को *चार प्रहरों में विभाजित किया गया* है, जिनका प्रत्येक साधक के लिए विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है।
15 फ़रवरी 2026 को *सायं 6 बजकर 11 मिनट से रात्रि 9 बजकर 23 मिनट तक प्रथम प्रहर* रहेगा। इस समय चंदन, चावल, काले तिल, कमल एवं कनेर के पुष्प से पूजन करें।
शिव के अष्ट नामों —
ॐ भवाय नमः,
ॐ शर्वाय नमः,
ॐ रुद्राय नमः,
ॐ पशुपतये नमः,
ॐ उग्राय नमः,
ॐ महानाय नमः,
ॐ भीमाय नमः तथा
ॐ ईषानाय नमः — का श्रद्धापूर्वक जप करें। नैवेद्य में पकवान अर्पित करें और नारियल तथा पान के साथ अर्घ्य दें। तत्पश्चात “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप प्रारंभ करें।
*द्वितीय प्रहर* 15 फ़रवरी रात्रि 9 बजकर 23 मिनट से 16 फ़रवरी रात्रि 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस समय तिल, जौ, कमल पुष्प और बिल्वपत्र से भगवान का पूजन करें। नैवेद्य में खीर अर्पित करें तथा बिजौरा नींबू के साथ अर्घ्य दें। इस प्रहर में प्रथम प्रहर से दुगना “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करना उत्तम माना गया है।
*तृतीय प्रहर* 16 फ़रवरी रात्रि 12 बजकर 35 मिनट से प्रातः 3 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में गेहूँ, आक के पुष्प, कमल, बिल्वपत्र और तिल से पूजन करें। नैवेद्य में पुए और शाक अर्पित करें। कपूर से आरती करें और अनार के साथ अर्घ्य दें। इस प्रहर में द्वितीय प्रहर से दुगना मंत्र जप कर साधना को और अधिक तीव्र करें।
*चतुर्थ प्रहर* 16 फ़रवरी प्रातः 3 बजकर 47 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस अंतिम एवं अत्यंत फलदायी समय में उड़द, कांगनी, मूंग, सप्त धान, शंखी पुष्प और बिल्वपत्र से पूजन करें। नैवेद्य में उड़द के बड़े और मिठाई अर्पित करें तथा केले के साथ अर्घ्य प्रदान करें। इस प्रहर में तृतीय प्रहर से दुगना मंत्र जप करें। कहा गया है कि *प्रथम प्रहर में जितना जप किया जाए, चतुर्थ प्रहर में उसका आठ गुना* करने का संकल्प साधक को आध्यात्मिक उन्नति की उच्च अवस्था तक पहुँचा सकता है।
विशेष रूप से *16 फ़रवरी 2026 की रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से 1 बजकर 01 मिनट तक का निषीथ काल*, अर्थात मध्यरात्रि पूजन मुहूर्त, अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस समय किया गया अभिषेक, रुद्रपाठ और शिव ध्यान साधक को शीघ्र फल प्रदान करता है।
प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करना अति शुभ है। अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, गंगाजल, छाछ, गन्ने का रस, शहद और शुद्ध जल का प्रयोग किया जा सकता है। यदि सभी द्रव्य उपलब्ध न हों तो केवल स्वच्छ जल से भी श्रद्धापूर्वक अभिषेक किया जा सकता है। प्रत्येक प्रहर में धूप-दीप अर्पित करना अनिवार्य माना गया है।
प्रातःकाल तक जप-भजन करते हुए रात्रि जागरण पूर्ण करें। *16 फ़रवरी 2026 को प्रातः 6 बजकर 59 मिनट से दोपहर 3 बजकर 24 मिनट के मध्य व्रत का पारण* करना उत्तम रहेगा। पारण से पूर्व भगवान शिव का अंतिम पूजन कर विधिवत विसर्जन करें और भगवान से क्षमा प्रार्थना करें कि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि हुई हो तो वे क्षमा प्रदान करें।
यदि साधक किसी विशेष कार्य सिद्धि, रोग मुक्ति, संतान प्राप्ति, वैवाहिक सुख या आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह व्रत कर रहा हो तो संकल्प में स्पष्ट उल्लेख अवश्य करें। परिवार सहित, विशेषकर पति-पत्नी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया पूजन अत्यंत शीघ्र फलदायी माना गया है।
महाशिवरात्रि की इस पावन रात्रि में किया गया जप, ध्यान और अभिषेक साधक के पापों, भय और बाधाओं का नाश कर उसे शिवत्व की दिशा में अग्रसर करता है। भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा से सभी साधकों की मनोकामनाएँ पूर्ण हों और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आध्यात्मिक जागृति का संचार हो।