*कांग्रेस वैचारिक और नैतिक रूप से दिवालियापन की शिकार है - डॉ. प्रतीक उमरे*

*कांग्रेस वैचारिक और नैतिक रूप से दिवालियापन की शिकार है - डॉ. प्रतीक उमरे*

*कांग्रेस वैचारिक और नैतिक रूप से दिवालियापन की शिकार है - डॉ. प्रतीक उमरे*
*कांग्रेस वैचारिक और नैतिक रूप से दिवालियापन की शिकार है - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि कांग्रेस वैचारिक और नैतिक रूप से दिवालियापन की शिकार है,मुद्दों पर गंभीर बहस के बजाय सस्ते नाटक और प्रदर्शन ही उनका एकमात्र हथियार बचा है।उन्होंने धान घोटाले के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी के नेताओं द्वारा आयोजित 'चूहा की बारात' जैसे तुच्छ प्रदर्शनों पर अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि यह न केवल किसानों की पीड़ा का अपमान है,बल्कि कांग्रेस की वैचारिक और नैतिक दिवालियापन का जीता-जागता प्रमाण है। जहां एक ओर राज्य सरकार धान खरीदी में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त कार्रवाई कर रही है,वहीं कांग्रेस चूहों को ही अपना निशाना बनाकर सस्ते नाटक रच रही है,जो उनकी राजनीतिक असफलता और बौद्धिक दिवालियापन को उजागर करता है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि राज्य के कई जिलों में करोड़ों रुपये के धान के गायब या खराब होने के मामलों में विभागीय अधिकारियों द्वारा चूहों-दीमकों को जिम्मेदार ठहराना तो पहले से ही शर्मनाक है,लेकिन कांग्रेस के मंत्रियों और नेताओं द्वारा चूहों की बारात निकालना,चूहा पिंजरा सौंपना और सड़कों पर चूहों के मॉडल लेकर नाचना-गाना – यह सब क्या है? यह किसानों के खून-पसीने की कमाई का मजाक उड़ाने के अलावा कुछ नहीं! छत्तीसगढ़ को 'धान का कटोरा' कहा जाता है, जहां लाखों किसान साल भर की मेहनत धान की फसल में लगाते हैं। लेकिन कांग्रेस, जो खुद सत्ता में रहते हुए कोयला घोटाला, शराब घोटाला और न जाने कितने कांडों में डूबी रही, अब चूहों पर ही अपनी राजनीति चला रही है।यह उनका नैतिक दिवालियापन है,जहां मुद्दों पर गंभीर बहस करने की बजाय सर्कस का तमाशा ही बचा है।उन्होंने चूहे वाले विषय पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस के ये 'चूहा-प्रेमी' नेता सोचते हैं कि चूहों की बारात निकालकर वे जनता को बेवकूफ बना लेंगे? क्या चूहे ही धान चुराते हैं या कांग्रेस के सत्ता काल में चूहे बनकर भ्रष्टाचार करने वाले उनके नेता? कवर्धा में 26 हजार क्विंटल धान के गायब होने पर जब भाजपा सरकार ने तुरंत जांच शुरू की, दोषी अधिकारियों पर निलंबन और एफआईआर दर्ज की, तो कांग्रेस क्या कर रही थी? चूहों की माला पहनकर सड़कों पर उछल-कूद! यह प्रदर्शन न केवल व्यंग्य का विषय है, बल्कि किसानों के लिए अपमानजनक है। अगर चूहे इतने ही शक्तिशाली हैं, तो कांग्रेस बताए कि उनके शासन में चूहों ने कितना धान खाया या फिर चूहों के नाम पर उनके नेताओं ने कितना लूटा? यह सस्ता नाटक उनकी वैचारिक खालीपन को छिपाने का प्रयास है, लेकिन जनता सब देख रही है। भाजपा सरकार ने इस वर्ष 17.77 लाख किसानों को 23,448 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, 38 से अधिक कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की है लेकिन कांग्रेस के पास तो चूहों के अलावा कोई मुद्दा ही नहीं बचा है।

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