प्रदेश के विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर अभाविप का महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन

प्रदेश के विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर अभाविप का महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन

प्रदेश के विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर अभाविप का महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन
प्रेस विज्ञप्ति
जिला : रायपुर छत्तीसगढ़ 
दिनांक : 21/01/2025

प्रदेश के विश्वविद्यालयों से संबंधित प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर अभाविप का महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन
रायपुर।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों से जुड़े गंभीर प्रशासनिक विषयों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं में उत्पन्न अनियमितताओं को लेकर महामहिम राज्यपाल श्री रमेन डेका जी से भेंट कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मंडल में प्रदेश संगठन मंत्री श्री महेश साकेत, प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री यज्ञदत्त वर्मा, प्रदेश सह मंत्री श्री प्रथम राव फुटाने एवं रायपुर महानगर मंत्री श्री सुजल गुप्ता उपस्थित रहे ज्ञापन में निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हुई। 

1. राज्यपाल के सचिव का पत्र क्रमांक 7117/1225/2024/रास/यू-14, दिनांक 23/12/2024 महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, पाटन (दुर्ग) में कुलसचिव पद के संबंध में असमंजसपूर्ण स्थिति

उपर्युक्त विश्वविद्यालय में कुलसचिव पद को लेकर वर्तमान में ऐसी स्थिति बन गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर असमंजस उत्पन्न हो गया है। असमंजस की इस स्थिति के पीछे उक्त सन्दर्भित पत्र 1 के माध्यम से विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलसचिव श्री आर.एल. खरे के विरुद्ध विभागीय जाँच हेतु लोकभवन द्वारा जारी किया गया आदेश है। इस आदेश द्वारा श्री आर. एल. खरे को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया था। तत्पश्चात् इसी आदेश के पालन में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं कृषक कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उपर्युक्त पत्र कृषि एवं कृषक कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन का आदेश क्रमांक एफESTB-104(1)/76/2025/14-1, दिनांक 06/10/2025 द्वारा श्री यशवन्त केराम की पदस्थापना प्रतिनियुक्ति पर कुलसचिव के रूप में की गई थी। श्री आर. एल. खरे द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया और उसके बाद यह स्पष्ट किया गया कि प्रकरण में अतिरिक्त विभागीय कार्यवाही अपेक्षित नहीं है। तदुपरान्त उपर्युक्त आदेश 3 राज्यपाल के सचिव का आदेश क्रमांक 22/1225/2024/रास/यू-14, दिनांक 02/01/2026 के द्वारा माननीय कुलाधिपति द्वारा श्री आर. ए. खरे को पुनः प्रथम कुलसचिव के रूप में नियुक्त कर दिया गया, किन्तु तब तक वर्तमान कुलसचिव श्री यशवन्त केराम ने कुलसचिव के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया था। ऐसे में कुलसचिव के पद पर दो व्यक्तियों की नियुक्ति ने असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर दी है। अतएव विद्यार्थी परिषद का विनम्र मत है कि इस विषय पर स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश प्रदान होने से विश्वविद्यालय का प्रशासन सुचारु रूप से संचालित हो सकेगा तथा किसी भी प्रकार की संस्थागत असुविधा से बचा जा सकेगा।

2. लोकभवन द्वारा जारी निर्देशों के संबंध में विनम्र अभिमत

राज्यपाल के उपसचिव का पत्र क्रमांक 6670/11010/2025/रास/यू-3, दिनांक 30/12/2025 के माध्यम से आपके द्वारा इस प्रकार का पत्र शिक्षा जगत में गंभीर भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। यह पत्र राज्य शासन के विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध महाविद्यालयों के कर्मचारियों पर विद्यमान प्रशासनिक नियंत्रण को व्यावहारिक रूप से नकारने वाला प्रतीत होता है, जबकि यह निर्विवाद तथ्य है कि उक्त कर्मचारियों के प्रथम नियुक्तिकर्ता स्वयं राज्य शासन हैं तथा उन्हें वेतन एवं सेवा लाभ भी राज्य शासन से ही प्राप्त होते हैं। ऐसी स्थिति में यदि इस पत्र के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाता है, तो विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के कर्मचारी राज्य शासन के प्रति अपनी प्रशासनिक जवाबदेही से लगभग मुक्त हो जाएंगे, जो न केवल प्रशासनिक संतुलन के लिए घातक होगा बल्कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन एवं उत्तरदायित्व की भावना को भी कमजोर करेगा।

3. छ.ग. स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एम. के. वर्मा के विरुद्ध चल रही जाँच के सम्बन्ध में भिलाई स्थित छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानन्द तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एम. के वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोपों के विरुद्ध जाँच के आदेश दिये गए थे। इसके पालन में एक जाँच कमिटी भी गठित की गई थी। किन्तु इसकी जाँच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। इस दिशा में तेजी से कार्य करने की आवश्यकता प्रतीत हो रही है।

4. इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कुलपति की नियुक्ति से संबंधित विषय

राज्यपाल के उपसचिव के आदेश क्रमांक एफ 1-6/2024/रास/यू-4, दिनांक 09/04/2025 के माध्यम से आपके द्वारा इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ में कुलपति की नियुक्ति की गई है। किन्तु नियुक्त कुलपति पर पूर्व में भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक कुप्रबंधन के गंभीर व सिद्ध आरोप रहे हैं, जिन पर सम्भवतः नियुक्ति के समय सम्यक विचार नहीं हो पाया है। यह भी उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के आदेश क्रमांक 01-23/2018/30, दिनांक 03.10.2018 के माध्यम से राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, अधिनियम 2009 की धारा 57 के अंतर्गत यह स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय का संचालन केवल विधिसम्मत, पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत ही किया जाना चाहिए। साथ ही वर्तमान कार्यकाल में पुनर्वित्त से संबंधित अनियमितताओं की सूचना प्राप्त हुई है। अतः विश्वविद्यालय की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता एवं छात्रहित की दृष्टि से उक्त नियुक्ति पर पुनर्विचार करते हुए आवश्यक जांच तथा दोषसिद्ध होने की स्थिति में कुलपति को पद से बर्ख़ास्त किया जाना उचित होगा।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, छत्तीसगढ़ ने उपर्युक्त चारों विषयों पर छात्रहित में तथा विश्वविद्यालयों की गरिमा एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करेंगे, जिससे राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय बन सके।

प्रदेश मंत्री श्री अनंत सोनी ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है, जहाँ कई विश्वविद्यालयों में आज भी स्थायी कुलपति एवं कुलसचिव नियुक्त नहीं हैं, वहीं महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में एक ही समय में दो कुलसचिवों की नियुक्ति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा धारा 57 के तहत भ्रष्टाचार एवं कुप्रबंधन के आरोपों में हटाई गई एक कुलपति आज एशिया की प्रथम इंदिरा संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलपति हैं वो यह भी अपनी निजी टैक्सी का किराया विश्वविद्यालय निधि से लेने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एम. के. वर्मा के विरुद्ध लंबित जांच में तेजी लाने की मांग की तथा राजभवन द्वारा 30/12/2025 को नियुक्ति व जांच संबंधी मामलों में कुलाधिपति के अनिवार्य अनुमोदन के आदेश पर चिंता व्यक्त करते हुए पुनर्विचार का आग्रह किया।

माननीय राज्यपाल श्री रमेन डेका जी ने प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्रस्तुत सभी विषयों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी विषयों पर प्रमुखता से विचार करने का आश्वासन दिया।

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