तिल्दा नेवरा।
दिलीप वर्मा।
छेरछेरा का उत्साह देखते ही बन रहा, सुबह से बच्चे सहित युवा, युवती निकले छेरछेरा मांगने।
छत्तीसगढ़ की पारम्परिक त्यौहार छेरछेरा पूर्णिमा आज है,
पौष माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह छेरछेरा पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन दान की परंपरा का उत्सव भी है।
छेरछेरा पर्व का मूल भाव यह है कि इस दिन अन्नदान को एक बड़ा पुण्य माना गया है।
तिल्दा नेवरा शहर सहित ग्रामीण अंचलों में सुबह से बच्चे टोलियों में निकले है और घर-घर जाकर छेरछेरा मांगते हुए नारा देते हुए कह रहे है
"छेरछेरा, माई कोठी के धान ला, हेरहेरा।”
क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों सहित शहरी ग्रामीण क्षेत्र में आज भी छेरछेरा की परंपरा जीवंत है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस पर्व में समान रूप से भाग लेते हैं। घरों में चावल, धान, या नगद राशि दान स्वरूप दी जाती है।
तिल्दा नेवरा शहर के ही वार्ड 19 सहित कई वार्डों में आज शनिवार सुबह से बच्चे, युवा, युवती टोली बनाकर एवं बाजे गाजे के साथ छेरछेरा मांगने निकले हुए है।
आज शनिवार सुबह लगभग 6 बजे से यह छेरछेरा पर्व बड़े ही उत्साह के साथ तिल्दा नेवरा में मनाया जा रहा है।
बड़ी संख्या में बच्चे युवा युवती अलग अलग टोली बनाकर छेरछेरा मांगने निकले है।