*कांग्रेस का विरोध निराधार और ध्यान भटकाने वाला - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस पार्टी पर जोरदार पलटवार किया है।उन्होंने कांग्रेस को राजनीतिक अवसरवादिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम योजना को और मजबूत बनाने की दिशा में है,न कि इसे कमजोर करने की।डॉ. प्रतीक उमरे ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के विरोध को निराधार और ध्यान भटकाने वाला करार दिया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही विकास योजनाओं को राजनीतिक चश्मे से देखती आई है,मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत ग्राम रोजगार अभियान महात्मा गांधी' करने का प्रस्ताव सिर्फ एक रीब्रैंडिंग है,जो योजना को आधुनिक भारत की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए है। यह बदलाव योजना के मूल उद्देश्य को मजबूत करेगा,जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करना शामिल है।लेकिन कांग्रेस इसे गांधी परिवार की विरासत से जोड़कर अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है,जबकि योजना की शुरुआत से ही भाजपा सरकार ने इसका बजट बढ़ाया और क्रियान्वयन को पारदर्शी बनाया है।कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार और कागजी घोड़ों की शिकार बनी रही। यूपीए सरकार के समय मनरेगा में बड़े पैमाने पर घोटाले हुए, जिनकी जांच आज भी चल रही है।अब जब मोदी सरकार इसे डिजिटल और प्रभावी बना रही है,तो कांग्रेस को दिक्कत हो रही है।यह उनकी हताशा का प्रमाण है, क्योंकि वे जानते हैं कि ग्रामीण भारत अब भाजपा के विकास मॉडल पर भरोसा कर रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि यहां मनरेगा के तहत हजारों ग्रामीण परिवारों को लाभ मिला है और नाम बदलाव से कोई असर नहीं पड़ेगा,बल्कि योजना और सशक्त होगी।कांग्रेस को नाम बदलने से ज्यादा योजना के क्रियान्वयन पर ध्यान देना चाहिए, जिसे उन्होंने अपने शासन में बर्बाद किया।भाजपा सरकार ने मनरेगा को आधार से जोड़ा, मोबाइल ऐप के जरिए पारदर्शिता बढ़ाई और बजट में वृद्धि की।यह सब कांग्रेस के समय नहीं हुआ।अब वे विरोध कर रहे हैं,क्योंकि उन्हें डर है कि मोदी सरकार की सफलताएं उनकी असफलताओं को उजागर कर रही हैं।