*कांग्रेस पार्टी ईवीएम पर दोषारोपण करने के बजाय अपनी ईवीएम से बनी सरकारों से इस्तीफा दिलाए - डॉ. प्रतीक उमरे*
*कांग्रेस पार्टी ईवीएम पर दोषारोपण करने के बजाय अपनी ईवीएम से बनी सरकारों से इस्तीफा दिलाए - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने हाल ही में संसद में चुनाव सुधारों पर चली बहस और ईवीएम की विश्वसनीयता पर कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर तीखा कटाक्ष किया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब चुनाव हारती है तब ईवीएम पर दोषारोपण करती है,लेकिन जब ईवीएम से ही जीतकर सत्ता में आती है या उसके नेता सांसद बनते हैं तब ईवीएम पर कोई सवाल नहीं उठाते।यह दोहरा मापदंड जनता अच्छी तरह समझ रही है।यदि कांग्रेस पार्टी को ईवीएम पर इतना ही अविश्वास है और वे इसे 'ब्लैक बॉक्स' कहकर लोकतंत्र पर खतरा बता रही हैं,तो उन्हें अपने नैतिकता के आधार पर ईवीएम से बनी अपनी सरकारों से इस्तीफा दिलाना चाहिए।कांग्रेस के नेता राहुल गांधी,मल्लिकार्जुन खड़गे सहित सभी सांसद और विधायक जो ईवीएम से चुने गए हैं,यदि ईवीएम पर भरोसा नहीं है तो इस्तीफा देकर बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव लड़ें।इससे उनकी सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।उन्होंने संसद में चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता और अन्य विपक्षी दल बैलेट पेपर पर लौटने की मांग कर रहे हैं,जबकि ईवीएम की शुरुआत कांग्रेस शासित दौर में ही हुई थी और सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार ईवीएम की विश्वसनीयता पर मुहर लगाई है।कांग्रेस का यह रवैया केवल हार के बहाने ढूंढने का प्रयास है।जब तेलंगाना,हिमाचल या कर्नाटक जैसे राज्यों में कांग्रेस जीती या उसके नेता ईवीएम से सांसद बने,तब ईवीएम ठीक थे,लेकिन अब हार पर ईवीएम गलत? यह पाखंड जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।ईवीएम ने भारत के लोकतंत्र को मजबूत बनाया है,धांधली को रोका है और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किया है।कांग्रेस को ईवीएम के विरोध में यदि इतना ही जोश है तो पहले अपनी ईवीएम से बनी कुर्सियों का त्याग करें,तभी उनका स्टैंड विश्वसनीय लगेगा।