फोटोग्राफी जीवन कला यात्रा इस जन्म में पूरा नहीं कर सकता..... वीरेंद्र पटनायक
शटर स्पीड के आकर्षण में अपार दर्शक दीर्घा...
बिदाईक्षण देख माताओं के निकले आंसू...
संवेदनशीलता और भावुकता के साथ इन छायाचित्रों को आत्मसात करने का अवसर मिला- रवि श्रीवास्तव
प्रकृति संयोजित अति उत्तम फोटोग्राफी- राजीव पाण्डेय
भिलाई-
ऐतिहासिक नेहरू आर्ट गैलरी का प्रांगण कम पड़ गया। भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ छायाकार की एकल प्रदर्शनी " भावनाओं के रंग पटनायक के संग का उद्घाटन श्रीमती यज्ञसेनी पटनायक (प्रदर्शनिकार की माता व वरिष्ठ ओडिया कवियित्री) और राजीव पाण्डेय, सी.जी.एम. (पावर फेसलिटी), भिलाई इस्पात संयंत्र दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथि थे रवि श्रीवास्तव (मूर्धन्य व्यंग-साहित्यकार) व वरिष्ठतम फोटोग्राफर श्री प्रमोद यादव।
सुगन्ध के बिना पुष्प, तृप्ति के बिना प्राप्ति, ध्येय के बिना कर्म एवं प्रसन्नता के बिना जीवन व्यर्थ है। इसी आदर्श के चरितार्थ, अनुसरण में लगे वरिष्ठ प्रदर्शनी छायाकार, सारंगढ़-भिलाई निवासी वीरेन्द्र पटनायक।
फोटोग्राफी के प्राय: सभी विधाओं और स्कील को मनोहारी व्यवस्थित प्रदर्शन संयोजन देखा गया, शहर के मध्य स्थित सिविक सेंटर नेहरु आर्ट गैलरी में।
कलाप्रेमियों को इस प्रदर्शनी में वीरेन्द्र पटनायक की 40 वर्षों की रचना धर्मिता को समझने का मौका मिला। पान पानी और पैलगी की नगरी सारंगढ़ से ही उन्हे फोटोग्राफी का जुनून छात्रवस्था से सवार हो गया था, जिसे सिंचित व सुसज्जित किया रायपुर-भिलाई-दुर्ग-जगदलपुर की प्रकृति, संस्कृति और संगति ने। फोटोग्राफी दस्तावेजीकरण के माध्यम से विरासत को संरक्षित करना और पर्यावरण की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। उनके फोटोग्राफी में जीवन शैली व संस्कृति का जीवंत सामंजस्य परिलक्षित हो रहा है।
# अन्य उपलब्धियाँ:-
(1 )- सेल में सर्वप्रथम स्वरचित छत्तीसगढ़ी सुरक्षा गीत का राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस, 4 मार्च 2000 को गायन व मंचन, तत्कालीन प्रबंध निदेशक श्री विक्रांत गुजराल जी द्वारा विशेष सम्मान।
(2)- राजकुमार कॉलेज में अयोजित स्पॉट फोटोग्राफी प्रतियोगिता में सम्मान।
(3)- ट्रिप्स एण्ड क्लिक्स, रायपुर द्वारा सम्मानित।
(4)- महंत घासीदास संग्रहालय, रायपुर में छायाचित्र प्रदर्शनी।
(5)- वाय.एच.ए.आई.,छत्तीसगढ व ओडिसा में वर्कशॉप- सम्मान।
(6)- डी.एल.एस., ऋषिकेश से सम्मानित।
(7)- कवर्धा जिले के ठाड़पानी जलप्रपात के शिखर तक खोजी फोटोग्राफी करने के लिए एस.एम.एस.-3, भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा सम्मानित।
(8)- "ललित कला अकादमी सृजन साधक" सांसद महोदय द्वारा सम्मानित।
(9)- प्रगतिशील लेखक संघ, भिलाई-दुर्ग द्वारा ओडिया कवि सम्मान।
# कार्य:-
1) दण्डकारण्य, बीजापुर, उसुर आदि जलप्रपात पर्यटक स्थलों को फोटोग्राफी के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने का सर्वप्रथम मुहिम चलाया व जारी। तत्कालीन विधायक और कलेक्टर महोदय द्वारा सम्मानित।
2) सारंगढ़ के गोमर्डा अभ्यारण्य और विश्व प्रसिद्ध इकलौता गढ़ विच्छेदन को पर्यटन प्रचार-प्रसार के लिए कार्य जारी।
3) दान:- बहु प्रतीक्षित सारंगढ़ चिकित्सा महाविद्यालय को मृत शरीर दान और उसके पूर्व प्रधानमंत्री अंगदान के तहत अंगदान की प्रतिज्ञा घोषणा-पत्र
4) सारंगढ़-टाइम्स (अतिथी-सम्पादक)-स्वतंत्र लेखन
5) भिलाई-दुर्ग-रायपुर में पम्प्स-मोटर जल-सेवा को प्रतिबद्ध निज प्रतिष्ठान: श्री मंगला हाइड्रो टेक, दक्षिण गंगोत्री, सुपेला, भिलाई
अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया कि बचपन से ही मुझे संगीत, नाटक और फोटोग्राफी का शौक रहा है। मेरे चाचा श्री गौरीशंकर पटनायक जो उस समय (1970-83) भारतीय स्टेट बैंक, सारंगढ़, बिर्रा, सरिया क्षेत्र में सेवा दे रहे थे, के पास "रोलीफ्लेक्स" जर्मन 1929 कैमरा था और वह मेरी बहुत सी तस्वीर निकाला करते थे। बॉक्स वाला कैमरा था और 12 फिल्मों का एक श्वेत-श्याम रोल आता था। इसमें दो लैंस थे, एक देखने के लिए और एक फ्रेमिंग करने के लिए। यह कैमरा उनको न्यूज पेपर क्वीज कांपीटीशन पर उपहार मिला था। एक फ्लैश फोटो खींचने के बाद वह लैम्प फ्यूज या यूं कहें अनुपयोगी हो जाता था। फोटो क्लिक करने के बाद उसे रायगढ़ ले जाया जाता या भेजा जाता था। ब्लैक एंड व्हाइट का जमाना था और आवश्यक सुधार और संयोजन के बाद वह तस्वीर घर में आज भी रखी हुई है।
उनके साथ अक्सर मैं पिकनिक में बम्हन दाई पहाड़, थीपा, माढ़ो सिल्ली, केडार आदि जाता था, जहां मुझे भी फोटोग्राफी करने दिया जाता था। रायपुर आदर्श विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ते वख्त मुझे खुद की फोटो खिंचवाने का शौक जाहिर हुआ। तब के बस स्टैंड पर राज फोटो स्टूडियो वाले से मित्रता सी हो गई थी। इस क्रम में स्कूल से आज तक मैंने रोलीफ्लेक्स, आग्फा क्लिक-III, याशिका, पेंटेक्स, हाटसाट, जुर्की, निकॉन एफ एम-10 (SLR), नोकिया-मोबाइल, केनन, निकॉन D7000 (DSLR), सेमसंग मोबाइल कैमरा चलाते आ रहा हूं। वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के लिए कम से कम 70-300 का लेंस जरूरी है।
भिलाई इस्पात संयंत्र में सेवा के प्रारंभिक दिनों से लेकर आज तक मुझे प्रबंधन और मित्रों का बहुत ही आशातीत सहयोग मिलते आ रहा है। इस घूमक्कड़ी शौक में मां, पत्नी, भाई व परिवारजनों का पूरा सहयोग रहा है।
'बेटर फोटोग्राफी' पत्रिका से भी बहुत कुछ सीखने-समझने को मिला। 'कोरापुट-नियामगिरी-देवमल्ली-ट्राइबल-ट्रिप' के मार्गदर्शक और सहयात्री थे जेपुर (ओडिशा) के मेरे अग्रज, कुशल छायाकार व आकाशवाणी उद्घोषक मुरली पटनायक।
कला के विकास के लिए अभ्यास जरूरी है। चार दिवसीय पोर्ट ब्लेयर यात्रा के दरम्यान 30 रोल (35 मि.मी.) खिंचना पैसा बहाना था पर "करत करत अभ्यास के जड़मत होत सुजान"। यूथ हॉस्टल की ओर से मुझे टाइगर पॉइंट और पवई जलप्रपात (सरगुजा) व धासकुण्ड (महासमुंद) में कैमरे की स्लो शटर स्पीड विधा का प्रयोगात्मक अध्ययन, सीखने का मौका मिला। राजधानी रायपुर के वरिष्ठ छायाकार-सह-प्राचार्य शिशिर दास, शैलेष वर्मा, दीपेन्द्र दीवान,अखिलेश भरोष, राहुल शुक्ला, गोपा सान्याल, निलेश चिन्नावार व डाॅ.राहुल कुलकर्णी की टीम "ट्रिप्स एण्ड क्लिक्स" के साथ गरियाबंद जंगल और राजकुमार कॉलेज में फोटोग्राफी वर्कशॉप अटेंड किया। उन्होंने बताया कि कैमरा प्रचालन की विधि में आइ.एस.ओ., एपर्चर, शटर स्पीड, व्हाइट बैलेंस के साथ-साथ कंपोजिशन भी बहुत महत्व रखती है। गतिशील वस्तु जैसे चलती हुई ट्रेन, झरने, झूला के छायाचित्र लेने पर, मोशन फोटोग्राफी के लिए शटर स्पीड बहुत मायने रखता है। इस स्थिति पर हमें श्लो शटर स्पीड हेतु हैवी ट्राइपॉड लगाना होता है। रात में ट्रेल फोटोग्राफी का एक अलग ही अनुभव है। वाइल्डलाइफ के लिए अपने आप को सुरक्षा उपकरण, पोशाक युक्त बनाकर जाना चाहिए। क्लिक के बाद यथासंभव जल्दी से जल्दी अपने कैमरे से छायाचित्र को लैपटॉप पर डाउनलोड कर लें।
आज के दौर मे उपलब्ध स्मार्टफोन के सेल्फी मोड और फोटो एडिटिंग से हर कोई उत्तम फोटोग्राफर बनना चाहता है। और क्यों न हो। ग्रहण फोटोग्राफी के लिए एक्स रे फिल्म और वेल्डिंग ग्लाश का होना जरूरी है। चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की तस्वीर लेने के लिए मैंने एपर्चर और शटर स्पीड के साथ घंटों-घंटो खूब कबड्डी खेली है। खोजी छायाकार के रूप में भी वे अपना नाम संयंत्र पटल पर अंकित करवा चुके हैं। उनके सहमित्र अशोक मरार व ईश्वर पटेल का इस क्षेत्र में नाम कोई अनजाना नहीं है। पटनायक व पटेल ने मिलकर कोरोना काल पर कवर्धा के घोर जंगल में ठाड़ पानी जलप्रपात के प्रारंभिक छोर पर सर्वप्रथम पहुंचने का दुस्साहस किया और सफल रहे। इस पर संयंत्र प्रबंधन ने उन्हें पुरस्कृत भी किया है।
"दण्डकारण्य समूह" के रंजन दास के साथ मिलकर उन्होंने बीजापुर के सात- धार, ढोलकल गणेश, उसूर के जंगलों का सफल भ्रमण कर सर्वप्रथम पर्यटक कहलाए। पर्यटन के क्षेत्र में बीजापुर को बढ़ावा देने के लिए उन्हें तत्कालीन विधायक विक्रम मंडावी महोदय और जिलाधीश उमेश पटेल महोदय द्वारा सम्मानित भी किया गया।
मणिमहेश यात्रा वर्षाकाल में कैमरे की सुरक्षा व छायाकारी दोनों का अनुभव सीखा चुकी है। संयंत्र के वैगन रिपेयर शॉप (टी एण्ड डी) में वरिष्ठ चार्जमेन, विद्युत से सेवानिवृत्त पटनायक जी के छायाचित्र प्रदर्शनी के रूप में मैत्री बाग फ्लावर शो, वाय.एच.ए.आई.कैंप और महन्त घासीदास संग्रहालय रायपुर में लग चुकी है।
संगीत-साहित्य के जीवट स्मृति शेष पिता संगीतकार मदन मोहन पटनायक के पद चाप चलते हुए भावुक रूंधे स्वरों से वे कहते हैं- वही होई जो राम रचि राखा...।
युवाओं को संदेश में बताते हैं कि कामयाबी के लिए कोशिश करनी है। अनुभव ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है। अपने अंतर्मन की प्रतिभा को पहचानिए।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी पटनायक की कलम समाचारपत्र और पत्रिकाओं में भी चलते रहती है। देशबंधु के "मड़ई" कालम में शुरुआती लिखते हुए अब वे स्वतंत्र रूप से "सारंगढ़-टाइम्स" और "जगन्नाथ चैनल" के लिए लेखन-छायाकारी कर रहे हैं। इस माटी को अपना शरीर दान कर चुके पटनायक जी ने अंगदान भी किया है।
बातचीत में उन्होंने बताया कि साहित्य, संस्कृति, जैव विविधता और धरोहर को बनाए रखने के लिए फोटोग्राफी डाक्यूमेंटेसन जरूरी है। फोटोग्राफी एक चित्र कला ही नहीं भाव-भंगिमा, स्पंदन भी समझाती है। पर्यटन के साथ-साथ स्वच्छता रखना भी हमारा मूल उद्देश्य होना चाहिए। इस पुनीत कार्य के लिए हमें जनभागिदारी भी सुनिश्चित करना है। विश्व के इकलौते गढ़ विच्छेदन की परम्परा आज भी सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के मुख्यालय सारंगढ़ शहर में मनाया जाता है, इस परम्परा के साथ-साथ यहाँ के नवधा रामायण को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन मानचित्र में उकेरने की उनकी महति प्रयास और भूमिका जारी है।
मुझे फक्र और गर्व है कि मेरी विधाओं को मेरे दोनों बाजू पुत्र हर्षवर्द्धन पटनायक (अभिनय-कलाकार) और भांजे सर्वेश दास (रायपुर) सिनेमैटोग्राफी, विज्ञापन और टूर-ट्रैवल फोटोग्राफी के रूप में बनाए चल रहे हैं।
युवा वर्ग फोटोग्राफी और सेल्फी के उन्माद में दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं जो कि चिंताजनक है।
रूबरू: पटनायक से चर्चा
प्रश्न 1: आपकी यह एकल फोटो प्रदर्शनी किस विषय पर आधारित है?
उत्तर: यह प्रदर्शनी मेरे जीवनभर के कैमरा सफर की झलक है। इसमें प्रकृति, संस्कृति, लोकजीवन और शहरी परिदृश्य सभी को समेटने का प्रयास किया गया है। हर तस्वीर एक कहानी कहती है।
प्रश्न 2: फोटोग्राफी के इस लंबे सफर की शुरुआत आपने कब और कैसे की?
उत्तर: करीब चार दशक पहले कैमरा हाथ में आया था। शुरू में यह शौक था, लेकिन धीरे-धीरे यह मेरी पहचान और अभिव्यक्ति का माध्यम बन गया।
प्रश्न 3: इस प्रदर्शनी में दर्शक क्या नया अनुभव करेंगे?
उत्तर: यहाँ वे सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि संवेदनाओं को देखेंगे। मैंने कोशिश की है कि फोटो में रोशनी, रंग और भावों के माध्यम से समय की नब्ज़ को पकड़ा जा सके।
प्रश्न 4: एक फोटोग्राफर के लिए सबसे कठिन क्षण कौन-से होते हैं?
उत्तर: सबसे कठिन काम है सही पल को पकड़ना। पल छूट गया तो तस्वीर कभी पूरी नहीं बन सकती। धैर्य और सतर्कता फोटोग्राफर के सबसे बड़े गुण हैं।
प्रश्न 5: क्या यह प्रदर्शनी युवाओं को प्रेरणा देगी?
उत्तर: बिल्कुल। मेरी इच्छा है कि युवा पीढ़ी फोटोग्राफी को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़ी एक जिम्मेदारी के रूप में भी देखें।
प्रश्न 6: आपके अनुसार एक अच्छी तस्वीर की पहचान क्या है?
उत्तर: अच्छी तस्वीर वह है जो बिना शब्दों के भी संवाद कर सके। दर्शक उसमें अपने अनुभव और भाव ढूंढ सके।
प्रश्न 7: आपको अपनी अब तक की कौन-सी उपलब्धि सबसे खास लगती है?
उत्तर: कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं, परंतु सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि लोग मेरी तस्वीरों से जुड़ाव महसूस करते हैं और उन्हें अपनी स्मृतियों का हिस्सा बना लेते हैं।
प्रश्न 8: फोटोग्राफी के बदलते दौर (डिजिटल तकनीक) को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: बदलाव ज़रूरी है। तकनीक ने काम आसान कर दिया है, लेकिन संवेदना और दृष्टि अब भी सबसे अहम है। कैमरा बदल सकता है, पर नज़र और सोच वही मायने रखती है।
प्रश्न 9: इस प्रदर्शनी के बाद आपके अगले सपने क्या हैं?
उत्तर: मैं चाहता हूँ कि छत्तीसगढ़ और भारत की संस्कृति की और भी अनकही कहानियों को कैमरे के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचाऊँ।
इस मधुर बेला पर उनके साथ डा.विश्वनाथ पाणीग्राही (समाजसेवी व दुर्ग के स्वच्छता दूत),योगेन्द्र त्रिपाठी (अंतरराष्ट्रीय चित्रकार), प्रगतिशील लेखक संघ के शरद कोकास, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर शिशिर दास (रायपुर), मो.शरीफ (एजीएम वैगन रिपेयर शॉप), ईश्वर पटेल, अशोक मरार, पी.के.नंदी, महेश नायडू (फोटोग्राफर) हरि सेन, बृजेश तिवारी, अंकुश देवांगन, डी.एस.विद्यार्थी, जोसेफ गिलबर्ट (चित्रकारगण), अखिलेश वर्मा, खैरागढ़ इंकसं विश्वविद्यालय के ओडिसी प्रोफेसर पूनम गुप्ता, समीक्षा दास (जगदलपुर), लोक तबला वादक गोवर्धन सर्पे, सारंगढ़ से पटनायक के मित्र-परिवारजन, भिलाई-रायपुर-ओडिशा के उनके परिवारजन उपस्थित थे।