*सूर्य भी ठहर गए रामजन्म देखने चौथे दिवस उमड़े हजारों रामभक्त, गूँजा रामजन्म का उल्लास*

*सूर्य भी ठहर गए रामजन्म देखने चौथे दिवस उमड़े हजारों रामभक्त, गूँजा रामजन्म का उल्लास*

*सूर्य भी ठहर गए रामजन्म देखने चौथे दिवस उमड़े हजारों रामभक्त, गूँजा रामजन्म का उल्लास*
*राम जन्मोत्सव से लेकर अहिल्या उद्धार तक… श्रीराम कथा महिमा का भव्य चौथा दिन*

*राजन जी महाराज ने बताया सच्चा आनंद क्या है?*

*राम लला जन्म, नामकरण और अहिल्या उद्धार का भक्तिमय प्रसंग*

*सूर्य भी ठहर गए रामजन्म देखने चौथे दिवस उमड़े हजारों रामभक्त, गूँजा रामजन्म का उल्लास* 
भिलाई । आईटीआई मैदान, खुर्सीपार में जीवन आनंद फाउंडेशन भिलाई एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता श्री विनोद सिंह के संयोजन में पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से आयोजित श्रीराम कथा महिमा के चतुर्थ दिवस कथा में आज विशिष्ट श्रोता के रूप में वैशाली नगर के लोकप्रिय विधायक रिकेश सेन जी, भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मंत्री श्री जितेंद्र वर्मा जी, दुर्ग भाजपा जिलाध्यक्ष श्री सुरेंद्र कौशिक जी, दुर्ग आरएसएस परिवार से दिलेश्वर उमरे जी, समाजसेवी इंदरजीत सिंह जी पहुंचे साथ कई भाजपा नेता, नगर के माननीय जन एवं हजारों की संख्या में रामभक्त श्रोता श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा की शुरुआत एक एक भोजपुरी सोहर गीत के साथ की में जिसमें श्री राम जी के जन्म के पश्चात अयोध्या में किस तरह का हर्ष और उत्सव का माहौल व्याप्त था इसका जीवंत चित्रण किया। कैसे अयोध्या वासी खुशी से झूम रहे, रामजी का जन्म सूर्य वंश में हुआ है इसलिए गोस्वामी तुलसीदास जी के चौपाई का जिक्र करते हुए कहा कि इस उत्सव को देखने के लिए भगवान सूर्य एक महीने तक अपने स्थान पर ही रुके रहे और एक दिन एक मास की हो गई। पशु पक्षियों को दाने बांटे गए। राजा दशरथ ने अयोध्या में इतना दान दिया कि अयोध्या वासियों ने परम संतोष को प्राप्त किया। इस अवसर पूज्य राजन जी ने जीवन में आनंद की सच्ची परिभाषा क्या है इसका वर्णन किया। उन्होंने कहा आनंद वही है जिसे बताया नहीं जा सके। आनंद प्राप्त कर लेने वाला व्यक्ति किसी को बताने लायक नहीं रह जाता। आनंद प्रचार करने का विषय नहीं, बल्कि अनुभव कर नाचने का नाम है।
इसके पश्चात महाराज जी ने चारों भाइयों के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाया। क्यों चारों भाइयों का नाम भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न रखा। नाम के पीछे का कारण भी विस्तार से समझाया। गुरु विश्वामित्र के सानिध्य में राम जी के ताड़का वध प्रसंग, एवं धनुष यज्ञ के मार्ग में जाते हुए कैसे उन्होंने माता अहिल्या को अपने चरण से उनका उद्धार कर, उन्हें शिला से नारी का स्वरूप में पुन: जीवन दिया। तत्पश्चात पूज्य महाराज जी ने राम के मिथिला नगर पहुंचने का भक्तिमय प्रसंग सुनाया। अंत में उन्होंने श्रोताओं को सूचित किया कि कल वे श्रोता बनकर नहीं आएं बल्कि प्रभु श्री राम के बराती बनकर आएं क्योंकि कल वे प्रभु श्री राम एवं माता सीता का विवाह प्रसंग सुनाएंगे।

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