*छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता - डॉ. प्रतीक उमरे*
*छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर जोर देना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर और भाषाई पहचान को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि राज्य में रहने वाले लोग छत्तीसगढ़ी भाषा को अपनाएं और उसका सम्मान करें।डॉ. प्रतीक उमरे ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को छत्तीसगढ़ी भाषा नहीं आती उन्हें इस भाषा को सीखने का प्रयास करना चाहिए,क्योंकि यह न केवल स्थानीय संस्कृति से जुड़ने का माध्यम है,बल्कि राज्य की एकता और पहचान को भी मजबूत करता है।उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी भाषा हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास का अभिन्न हिस्सा है।यह हमारी माटी की सुगंध और हमारे लोगों की भावनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।छत्तीसगढ़ में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस भाषा के प्रति सम्मान और लगाव रखना चाहिए।यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी भाषा को न केवल जीवित रखें,बल्कि इसे और समृद्ध करें।छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देना केवल भाषाई गर्व का विषय नहीं है बल्कि यह स्थानीय समुदायों के बीच एकता और आपसी समझ को बढ़ाने का भी एक प्रभावी तरीका है।छत्तीसगढ़ी भाषा को अपनाने से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकीकरण को बल मिलेगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने छत्तीसगढ़ में रहने वाले उन लोगों से अपील किया जो अभी तक छत्तीसगढ़ी भाषा से परिचित नहीं हैं,कि वे इसे सीखने का प्रयास करें।यह कहना कि छत्तीसगढ़ में रहने वालों को छत्तीसगढ़ी भाषा नहीं आनी चाहिए,उचित नहीं है।
भाषा सीखना एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है और यह हमें स्थानीय समुदाय के करीब लाता है।उन्होंने स्कूलों,कॉलेजों और सामुदायिक संगठनों से अनुरोध किया कि वे छत्तीसगढ़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन करें।उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।उन्होंने सरकार,शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे छत्तीसगढ़ी भाषा को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने,साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने और स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।उन्होंने बताया कि वे जल्द ही छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए एक अभियान शुरू करेंगे,जिसमें स्थानीय समुदायों,युवाओं और बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा।इस अभियान का उद्देश्य छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना होगा।