एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने अभिभावकों पर दबाव बनाने वाले स्कूलों पर कार्यवाही के लिए डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लिखा पत्र
एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने अभिभावकों पर दबाव बनाने वाले स्कूलों पर कार्यवाही के लिए डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लिखा पत्र
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने एनसीईआरटी की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने अभिभावकों पर दबाव बनाने वाले स्कूलों पर कार्यवाही की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से किया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा की राज्य बोर्ड के स्कूलों में जहां एससीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होती है,वही सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें चलती हैं।एनसीईआरटी की किताबें सस्ती होती है लेकीन कमीशन के खेल में लिप्त कुछ निजी स्कूल संचालक दुकानदारों से साठ गाठ करके छात्रों के परिजनों को निजी प्रकाशकों की रिफरेंस किताबें खरीदने मजबूर कर दबाव बना रहे हैं तथा कई दुकानदार एनसीईआरटी की बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की बता कर बेच रहे हैं जो की पूर्णतः गैरकानूनी है।निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से काफी महंगी है जिससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।यही नहीं कई स्कूलों में,स्कूल से मिलने वाली बेल्ट,कापी,डायरी, रजिस्टर, ड्राइंग शीट तक खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है। जिससे अभिभावक दोहरी मार झेल रहे हैं।शासन प्रशासन के कड़े निर्देशों के बावजूद ज्यादातर निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबों को अपनी सूची में शामिल करने से परहेज कर रहे हैं। डॉ.प्रतीक उमरे ने कहा कि स्कूल से ही दुकान का पता बताया जाता है कि कहां से निजी प्रकाशक की किताब खरीदनी है और अभिभावकों को किताब में लिखे दाम पर ही किताब खरीदनी पड़ती है।क्योंकि स्कूलों की कमीशन बंधा होता है। उनके मुताबिक किताब वितरण के जो ठेके दुकानों को दे रखे हैं उसमें भी मनमर्जी चलाई जाती है,स्कूलों को जहां से कमीशन कम हुआ वहां से हटाकर दूसरी जगह आवंटित कर दिया जाता है।यदि दूसरी जगह से ली तो वह मान्य नहीं होगी, ऐसा कहकर अभिभावकों को डराया जा भी रहा है।इस पर लगाम लगाने वाले जिम्मेदार अधिकारी सब बातों का पता होते हुए भी अनदेखा कर रहे हैं।इससे जिला शिक्षा अधिकारियों की कार्य प्रणाली भी संदेह के घेरे में है।क्योंकि अब तक ऐसा करने वाले एक भी स्कूल पर कार्रवाई नहीं की गई है।
निजी स्कूल नहीं मुहैया कराते जानकारी
डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि प्रावधान है कि सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूल अपनी जरूरत के हिसाब से किताबें छपवाने की जानकारी एनसीईआरटी को मुहैया करवाएंगे लेकिन कोई भी निजी स्कूल ये जानकारी मुहैया नहीं करवाता है। बल्कि निजी प्रकाशकों के साथ मिलकर महंगे दामों पर किताबें खरीदने का अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं। ये सीधे तौर पर कोर्ट के आदेश की अवमानना भी है।
निजी प्रकाशकों की मौज
डॉ. प्रतीक उमरे ने एनसीईआरटी के लचर रवैए पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब एनसीईआरटी को पता है कि अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने वाला है तो उन्हें एक महीना पहले ही तैयारियां पूरी करनी चाहिए थीं। किताब छापने के लचर रवैए से निजी प्रकाशकों की मौज हो गई है। वहीं नकली किताबें हर साल बाजार में आ रही है पर इसे लेकर भी एनसीईआरटी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। जिसका फायदा निजी स्कूल व निजी प्रकाशक हर साल उठा रहे हैं।
कक्षा: एन.सी.ई.आर.टी रेट: प्राइवेट रेट:
पहली 500 1000-1100
दूसरी 650 1150-1300
तीसरी 600 1250-1500
चौथी 650 1100-1200
पांचवीं 850 1300-1400
छठी 850 2100- 2300
सातवीं 900 2150- 2200
आठवीं 950 2200- 2400
नौवीं 1050 2450- 2550
दसवीं 1200 2600-2700