दल्ली राजहरा: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष; महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है :श्रीमती रेखा गहरवाल

दल्ली राजहरा: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष; महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है :श्रीमती रेखा गहरवाल

दल्ली राजहरा: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष; महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है :श्रीमती रेखा गहरवाल

दल्ली राजहरा: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष; महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा पर सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें और तेजी लाने की आवश्यकता है :श्रीमती रेखा गहरवाल


आज देश केंद्र सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से महिलाओं की दशा सुधारने में एक नई शुरुआत हुआ है l आज देखे तो पहले के मुकाबले महिलाएं की दशा बेहतर हुई है l महिलाओं को अब सम्मान की दृष्टि से देखा जा रहा है l आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना सफलता की झंडा गाड़ रही है, चाहे विज्ञान के क्षेत्र हो राजनीति की क्षेत्र हो , रक्षा का क्षेत्र हो, प्रशासनिक सेवा का क्षेत्र हो या सामाजिक क्षेत्र और कोई क्षेत्र नहीं बचा जहाँ महिलाओं की कदम न पड़ा हो l एक ओर महिलाएं दिन-ब-दिन प्रगति कर रही हैं तो दूसरी ओर शोषण का शिकार भी हो रहे हैं l आज भी दहेज प्रताड़ना और महिलाओं पर शोषण के समाचार आए दिन अखबारों के माध्यम से पढ़ने और सुनने को मिलता रहता है l देश के कई अंदरूनी इलाके हैं जहां आज भी महिलाएं को शोषण और हेय की दृष्टि से देखा जाता है l 

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जर्मनी के महिला नेता समाजवादी क्लारा जेटकिन को नहीं भूलाया जा सकता है l क्लारा जेटकिन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बुनियाद रखी थी l जिसने दुनिया भर की महिलाओं के हक की लड़ाई तेज कर दी उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए ताकत दी l जिसके कारण महिलाएं रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए खुद को साबित करने लगी l अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत उन्हीं के विचारों से सहमत होकर संयुक्त राष्ट्र ने 1975 को आधिकारिक तौर पर 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने के लिए मान्यता दी थी l विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए महिलाओं की आर्थिक राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियां को सम्मान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है l आज से 119 वर्ष से पहले सन 1908 में महिलाओं के हक एवं अधिकार को लेकर करीब 15000 कामगार महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में एक परेड निकाली थी l जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रयास था l देश में महिलाओं की दशा सुधारने के लिए कई प्रयास हुए इसमें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी के द्वारा राष्ट्रीय पेंशन योजना , इंदिरा गांधी मातृत्व सहायता योजना , मातृत्व पोषण योजना जैसे विभिन्न योजनाएं लाई गई l मात् सहायता योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रसूति के समय सहायता राशि दी जाने लगी l मात् पोषण योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान करने वाली माताओ बच्चों के लिए पोषण और स्वास्थ्य संबंधित सहयोग किया जाने लगा l आज भी वर्तमान सरकार के द्वारा कई तरह के योजनाएं लाई गई है जिसमें महिलाओं के विकास में नोनी सुरक्षा योजना नवा बिहान योजना है l सरकार के द्वारा महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से हेल्पलाइन जारी की गई है l आप 181 में डायल कर इस संबंध में शिकायत कर सकते हैं l दल्ली राजहरा के राजहरा खदान समूह के अधिकारियों की पत्नियों के द्वारा संचालित राजहरा महिला समाज महिलाओं के उत्थान में कार्य करने वाली एक बेहतर संस्था है l जिनके माध्यम से विभिन्न क्षेत्र में इनके द्वारा सहयोग किया जाता है l

      डॉक्टर शिरोमणि माथुर

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर क्या कहती हैं दल्ली राजहरा के मात् शक्तियां दल्ली राजहरा के प्रतिष्ठित समाज सेवी मातृशक्ति डॉक्टर शिरोमणि माथुर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपना विचार रखते हुए बताई की पहले के मुकाबले हमारे देश में महिलाओं की दशा में सुधार आया है , यह प्रगतिशील राष्ट्र का उदाहरण है l आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपना प्रभाव दिखा रही है सरकार के द्वारा महिलाओं के सम्मान में मात् वंदन योजनाएं लाई गई है l यह महिलाओं का सम्मान है लेकिन इस योजना की दुखद पहलू यह है 60 वर्ष से अधिक महिलाओं को इस श्रेणी में नहीं रखा गया है तथा अविवाहित बेटियों को भी इस श्रेणी से बाहर रखा गया है l उसमें सुधार करें क्योंकि कई बार स्थिति ऐसा आता है अधिक उम्र के महिलाएं परिवार में अकेली हो जाती है तथा कई बेटियों की किसी कारणवश विवाह नहीं हो पाता उन दोनों को इस समय पैसे की आवश्यकता रहती है l यदि सरकार के द्वारा इन्हें भी इस योजना में शामिल किया जाए तभी सही मायने में महिलाओं का सम्मान कहा जाएगा l

 राजहरा महिला समाज अध्यक्ष श्रीमती रेखा गहरवाल

राजहरा महिला समाज की अध्यक्षा श्रीमती रेखा गहरवाल जी ने अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस की सभी महिलाओं को हार्दिक शुभकामनाए दी उन्होंने कहा यह दिन समूचे विश्व में महिलाओं के त्याग, साहस और सम्मान को समर्पित है। किसी भी देश के आबादी का आधा हिस्सा महिलाएं की होती है । उस अनुपात में उनके ऊपर खर्च होने वाले संसाधनों के पुरुषों के मुकाबले कमी देखी जाती है l जिससे वे उपेक्षित व वंचित रहती है। उन्हें बराबरी का दर्जा देने के लिए हमारे देश में केन्द्र व राज्य सरकार विभिन्न योजनाओ का संचालन कर रही है l जैसे- बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ, समान कानूनी अधिकार उज्जवला योजना, महिला आरक्षण, महतारी वंदन योजना , सुकन्या योजना इत्यादि । निश्चित रूप से विभिन्न सरकारी संस्थानों और सरकारी योजनाओं तथा जागरूकता से महिलाओ की दशा में तेजी से सुधार हो रहा है। उनमे आत्मविश्वास बढ़ा है।

महिलाओ के अधिकारों तथा सुरक्षा के लिए सरकार ने जो उचित कदम उठाए है उसमे और तेजी लाने को आवश्यकता है। महिलाओं का सबसे उत्कृष्ट रूप मातृत्व का है और यह बहुत हो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है l 'माँ' बच्चो की प्रथम शिक्षक होती है l बेटी- बेटे में भेदभाव न करते हुए उन्हें सभी क्षेत्रों में समान अवसर प्रदान करे। सम्मान परिवारों से हो बनता है, जब परिवार से ही भेदभाव खत्म हो जाएगा तो उसका अच्छा असर समाज पर स्वतः हो जाएगा। अन्ततः हम बोल सकते है
बेटी पढ़ेगी, आगे बढ़ेगी, समाज गढ़ेगी l 

अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महिला खिलाड़ी अनीता शिंदे

अन्तर राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महिला खिलाड़ी अनीता शिंदे ने कही जैसा कि मैंने खिलाड़ी जीवन में यह महसूस किया है कि हमारे क्षेत्र और आस पास के ग्रामीण सूदूर अंचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है उदारण वीणा ठाकुर ,मोनिका ध्रुव जिन्होंने राष्ट्रीय स्पर्धा में पदक लाया है ,यदि खिलाड़ियों को निम्न सुविधाएं प्रदान की जाती है तो महिला खिलाड़ियों द्वारा ओलम्पिक में पदक जीता जा सकता है :-
1आवासीय खेल छात्रवास।
2.अंतराष्ट्रीय खेल समाग्री ।
3.केंद्र व राज्य शासन द्वारा प्रतिभावान उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए जारी योजनाओं का सही समय पर क्रियान्वन होना।

श्रीमती द्रोपती साहू सचिव,महिला प्रकोष्ठ जिला साहू संघ बालोद

आज हर मामले में महिलाएं आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हैं और पुरुषों के बराबर सब कुछ करने में सक्षम भी हैं l हमें महिलाओं का सम्मान जेंडर के कारण नहीं, बल्कि स्वयं की पहचान के लिए करना होगा l हमें यह स्वीकार करना होगा कि घर और समाज दोनों के भलाई के लिए पुरुष और महिला दोनों समान रूप से योगदान करते हैं l इस जीवन को लाने वाली महिला है l इसलिए महिलाओं को जगत जननी कहा जाता है l महिलाएं हर क्षेत्र में विशेष होती है, चाहे वह घर पर हो या ऑफिस में,अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण की बात करें तो महिलाओं को अपने हक और अधिकार के लिए पहले खुद से लड़ना होगा, ताकि वह दुनिया से लड़ने में मजबूत हो सके l आपको यह स्वीकार करना चाहिए कि आप आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए जीवन में सशक्त हैं l महिलाओं के रूप में लिया जाने वाला पहला महत्वपूर्ण कदम आत्मविश्वास बढ़ाकर आत्मसम्मान हासिल करना, अपना महत्व को समझना है l

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