आज महिलाएं हो रही आत्मनिर्भर और महिलाओं का हो रहा सम्मान द्रोपती साहू
दल्लीराजहरा:– श्रीमती द्रोपती साहू (सचिव,महिला प्रकोष्ठ जिला साहू संघ बालोद व मीडिया प्रभारी, डीबी रक्तदान ग्रुप दल्लीराजहरा) ने सभी नारीशक्तियो को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी और बताया कि महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए दुनिया भर में 8 मार्च को इस दिन को महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को इसलिए भी सेलिब्रेट किया जाता है ताकि महिलाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
भारत सरकार ने 2001 को महिला सशक्तिकरण का वर्ष घोषित किया। महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए राष्ट्रीय नीति 2001 में पारित की गई थी।
महिला दिवस की शुरुआत किसने की? संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय महिला साल 1975 में मनाना शुरू किया। 1977 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूनाइटेड नेशन जेनरल असेंबली) ने सदस्य देशों को महिलाओं के अधिकारों और विश्व शांति के लिए 8 मार्च को इंटरनेशनल विमेंस डे के रूप में घोषित करने के लिए आमंत्रित किया।
आगे उन्होंने बताया कि आज हर मामले में महिलाएं आत्मनिर्भर और स्वतंत्र हैं और पुरुषों के बराबर सब कुछ करने में सक्षम भी हैं. हमें महिलाओं का सम्मान जेंडर के कारण नहीं, बल्कि स्वयं की पहचान के लिए करना होगा. हमें यह स्वीकार करना होगा कि घर और समाज की बेहतरी के लिए पुरुष और महिला दोनों समान रूप से योगदान करते हैं. यह जीवन को लाने वाली महिला है. हर महिला विशेष होती है, चाहे वह घर पर हो या ऑफिस में.अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण की बात करें तो महिलाओं को अपने हक के लिए पहले खुद से लड़ना होगा, ताकि वह दुनिया से लड़ने में मजबूत हो सके. आपको यह स्वीकार करना चाहिए कि आप आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए जीवन में सशक्त हैं. महिलाओं के रूप में लिया जाने वाला पहला महत्वपूर्ण कदम आत्मविश्वास बढ़ाकर आत्मसम्मान हासिल करना, अपना महत्व समझना एवं अपनी देखभाल कर के विकास अपना सम्मान करना है. आत्मसम्मान के विकास में अपनी अंदरूनी शक्ति को प्रभावशाली विचारों से सजाना है.