सिंधी समाज राम कृष्ण ओर भगवान झूलेलाल के वंशज हैं ,,,,संत लाल साई
श्री झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा के संत लाल साई जी का दिव्य सत्संग समारोह शहडोल में श्री झूलेलाल मंदिर में आयोजित किया गया।
जैसे ही साई जी का आगमन रात्रि 8:00 बजे मंदिर में हुआ महिला सेवा समिति के द्वारा साई जी की आरती एवं फूलों की वर्षा की गई आयो लाल झूलेलाल से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा जय झूलेलाल सेवा मंडल के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के द्वारा संतलाल साईं जी का फूलों की बड़ी माला पहनाकर स्वागत व पखर पहनाकर सम्मान किया गया।
इस अवसर पर पत्रकार फोटोग्राफर विजय दुसेजा का भी फूलों की माला पहनाकर पखर पहनाकर स्वागत और सम्मान किया गया व अन्य आए हुए अतिथियों का स्वागत किया गया सत्संग की शुरुआत भगवान झूलेलाल जी की भव्य मूर्ति को माल्यार्पण एवं पाखर पहनाकर दीप प्रज्वलित करके की गई रवि रूपवानी के द्वारा भक्ति भरे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई
लाल आया है झूलेलाल आया है हमारा ज्योति वारा भगवान आया है
चकरभाटा जो संत साईं लाल दास आयो आ
साईं जी आपके चरणो में सारी उम्र गुजार दू
ऐसे कई अन्य भक्ति भरे भजन गाए जिसे भक्तजन सुनकर भाव विभोर हो गए जिस घड़ी का हमें इंतजार था वह घड़ी अब आ गई बेसब्री से जिसका इंतजार था वह समय अब आ गया क्योंकि विगत 2 वर्षों से करोना महामारी के कारण चालिहा महोत्सव नहीं मनाया गया था इस बार देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है और शहडोल की भी साध संगत साई जी के दीदार एवं सत्संग के अमृतवाणी का 2 वर्षों से इंतजार कर रही थी साईं जी ने अपनी अमृतवाणी में मोती भरे शब्दों से अमृत रूपी वर्षा की सत्संग में साई जी ने फरमाया सिंधी समाज राम कृष्ण भगवान झूलेलाल जी के वंशज है क्योंकि हमारा इष्ट देव भगवान झूलेलाल है और हम हिंदू हैं तो हम भगवान राम और कृष्ण जी के वंशज हैं
रामायण के एक संदेश भरा वाकया सुनाया कि जब भगवान रामचंद्र जी लंका में जाने के लिए समुद्र में सेतु बांध रहे थे तो हर कोई वानर बड़े-बड़े पत्थर राम लिखकर समुद्र में फेंक रहे थे तब भगवान श्री राम जी ने सोचा जब मेरे नाम से लिखा वह पत्थर तैर रहा है तो मैं भी एक पत्थर फेंकता हूं जैसे ही उन्होंने बड़ा पत्थर उठाया और समुद्र में फेंका तो वह डूब गया तब यह नजारा हनुमान जी ने देख लिया और हंसने लगा तो प्रभु राम जी ने कहा हनुमान यह बात किसी को मत बताना हनुमान जी ने कहा सब को बताऊंगा प्रभु राम जी ने कहा हनुमान तुम हमारे भक्त होकर हमारी बात नहीं मानोगे तब हनुमान जी ने कहा प्रभु आप की लीला अपरंपार है जिसे आप ने पकड़ कर रखा है वह तो भोव सागर पार कर ले और जिसे आपने छोड़ दिया वह अपने आप ही डूब जाएगा इस
वाक्य से यह शिक्षा मिलती है जब तक आप के मुख् में राम राम का नाम है राम की भक्ति है तब तक आपको इस मोह माया में इस भवसागर में कोई डूबा नहीं सकता है और जब यह बात रावण को पता चली कि सेतु बनाया जा रहा है और बड़े पत्थर समुद्र में फेंके जा रहे हैं तो रावण की सेना ने कहा कि हम उनसे कैसे लड़ाई लड़ेंगे रावण ने कहा इसमें कौन सी बड़ी बात है हम भी पत्थर फेकेगे वह भी समुद्र में नहीं डूबेगा चलो हमारे साथ समुद्र किनारे पहुंचे एक बड़ा पत्थर उठाकर रावण ने आंखें बंद कर कर मंत्र पढ़ा और समुद्र में फेंक दिया तब वह पत्थर डूबा नहीं
यह सब देखकर रावण की सेना जय लंकेश जय लंकेश बोलने लगी और जब यह बात मंदोदरी को पता चली तब उसे विश्वास नहीं हो रहा था रात्रि के समय जब रावण अपने कक्ष में पहुंचे तब मंदोदरी ने पूछा कि यह बात सही है रावण ने कहा हां यह बात सही है मंदोदरी ने कहा पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा है नाथ अब आप सच सच बताइए कि आपने आंखें बंद करके कौन सा मंत्र पढ़ा तो रावण टालमटोल करने लगा अंत में उसे बताया कि मैंने आंखें बंद करके पत्थर से कहा तुझे भगवान राम की कसम है तू डूबना मत
इस बात से हमें यह शिक्षा मिलती है कि रावण को भी आखिर राम का नाम लेना पड़ा और राम के नाम का सहारा लेना पड़ा बगैर राम का नाम लिए ना मुक्ति मिलेगी ना मोक्ष मिलेगा और भगवान रामचंद्र जी का जन्म से लेकर अंत तक सारा जीवन मर्यादा पुरुषोत्तम की तरह रहा अगर कोई भी व्यक्ति समझ ले उसे अपने जीवन में उतार दे उसका जीवन सफल हो जाएगा
दूसरी कथा साईं जी ने वाल्मीकि की सुनाई किस तरह वाल्मीकि पहले डाकू था जंगलों में पेड़ों के पीछे छुप कर बैठे रहता था आने जाने वाले लोगों को मारता था वह उनके सामान सोना चांदी हीरे लूट लेता था एक बार वहां से नाराद जी गुजर रहे थे वाल्मीकि ने नारद जी को पकड़ लिया तब नारद जी ने कहां रुक जाओ तुम मुझे भले पेड़ से बांध दो और मेरी बात का उत्तर दो उसके बाद जो तुम्हें करना है कर लेना नारद मुनि ने कहा तुम यह सब पाप किसके लिए करते हो उन्होंने कहा अपने बच्चों के लिए अपनी बीवी के लिए नारद जी ने कहा तो क्या इस पाप के वह भागीदार हैं इस पाप की जो सजा मिलेगी क्या वह सजा के भागीदार बनेंगे? डाकू ने कहा बिल्कुल बनेंगे
नारद जी ने कहा नहीं जा कर पूछ कर आओ डाकू घर गया सारी कहानी बताई जो मैं पाप कर के लोगों को मार के लाता हूं सोना चांदी हीरे मोती लाता हूं तो जो इस पाप की सजा मुझे मिलेगी तुम लोग मेरा साथ दोगे ?
यह बात सुनकर डाकू की पत्नी ने कहा उससे हमको कोई मतलब नहीं है तुम जो पाप करते हो उसकी सजा तुम खुद भूकतो नारद जी ने कहा जिस परिवार वालो के लिए पाप कर रहे हो वही इस पाप के भागीदार बनने को मना कर रहे हैं तो फिर ऐसा पाप क्यों कर रहे हो इसकी सजा तुम्हें अकेले भुगतनी पड़ेगी डाकू नारद जी के पैरों में गिर पड़ा माफी मांगने लगा
नारद जी ने का उठो तुम्हारा उद्धार प्रभु श्री राम के नाम से ही हो सकता है तुम राम नाम का जाप करो तो डाकू के मुंह से इतने पाप किए थे कि राम का शब्द नहीं निकल पा रहा था बड़ी कोशिश के बाद मरा मरा शब्द का उच्चारण हो रहा था नारद जी ने कहा कोई बात नहीं तुम मरा मरा ही बोलते जाओ अंत में मरा मरा राम में पहुंच गया और राम राम का नाम जपने लगा वह डाकू आगे चलकर महापुरुष ब्रह्मज्ञानी वाल्मीकि ऋषि मुनि बना जिसने भगवान श्री राम जी के जन्म के 10 हजार वर्ष पूर्व ही पूरी रामायण लिख डाली
इससे हमें शिक्षा मिलती है कि जो भी हम पाप करेंगे उसकी सजा हमें ही भुगतनी पड़ेगी इसलिए कर्म अच्छे करो बुरे नहीं आखिर में साईं जी ने चालिहा उत्सव की महिमा बताई एवं कई भक्ति भरे भजन गाए जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया आम भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्तजनों ने भंडारा गृहण किया इस सत्संग में शामिल होने के लिए भक्तजन शहडोल ,बुढार, धनपुरी, अमलाई ,अनूपपुर, उमरिया व अन्य आसपास क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे थे
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में झूलेलाल सेवा समिति के सभी सदस्यों का सहयोग रहा
जिनमें प्रमुख हैं चंदन बहरानी, पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लालचंद कुंदनानी, उपाध्यक्ष मोहन आहूजा, झूलेलाल मंडल के सदस्य किशनपाल ,नंदू मंगलानी , मोहन थदानी, पप्पू लालवानी, मुरली कटारिया, हैप्पी थदानी, किशन आहूजा, महेश फबयानी, विजू जसवानी, प्रह्लाद जगवानी, नवयुवक मंडल के अध्यक्ष संजय रोहरा, जेपी नागवानी, भारतीय सिंधु सभा के दिलीप लहोरानी, राजकुमार लहोरानी, निखिल कटारिया, दिलीप चेलानी , डॉक्टर मोटवानी, दुख सुख महिला समिति की अध्यक्ष माया बजाज, सिंधु महिला शक्ति की अध्यक्ष ज्योति मिरानी ,किरण कटारिया, युक्ता जगवानी, दीपा मंगलानी एवं आदि सदस्यों का सहयोग रहा
श्री विजय दुसेजा जी की खबर