शिव अर्थात कल्याण,, शिव की पूजा करने हेतु कल्याण रूप बनना आवश्यक ,,संत राम बालक दास

शिव अर्थात कल्याण,, शिव की पूजा करने हेतु कल्याण रूप बनना आवश्यक ,,संत राम बालक दास

शिव अर्थात कल्याण,, शिव की पूजा करने हेतु कल्याण रूप बनना आवश्यक ,,संत राम बालक दास

शिव अर्थात कल्याण,, शिव की पूजा करने हेतु कल्याण रूप बनना आवश्यक ,,संत राम बालक दास

 बालोद जिला के पाटेश्वर धाम के संत राम बालक दास जी के द्वारा उनके विभिन्न ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप में प्रतिदिन प्रातः 10:00 से 11:00 बजे एक साथ अद्भुत सत्संग का आयोजन किया जाता है, जिसमें भक्तगण अपनी विभिन्न विषयों पर चाहे वह समसामयिक हो, व्यावहारिक हो, पारिवारिक हो या फिर धर्म सम्बन्धी सभी पर जिज्ञासा रखते है और बाबा जी से उनका समाधान प्राप्त करते हैं| इस सत्संग में सुंदर-सुंदर भजनों की भी प्रस्तुति भक्त गणों के द्वारा एवं बाबा जी के द्वारा की जाती है जिससे यह सत्संग और भी आनंद मय हो जाता है

              आज की सत्संग परिचर्चा में पुरुषोत्तम अग्रवाल जी थान खमरिया ने जिज्ञासा रखी की , शास्त्रों में वर्णित शिवोभूत्वा शिवं यजेत् पर कृपया प्रकाश डालने की कृपा करें, बाबा जी ने बताया कि इस शलोक का तात्पर्य यह है, कि शिव को वैसे ही पूजा जाए जैसे वह हैं तो इसका अर्थ यह कभी नहीं कि जहां भोले का विग्रह हो उसी को पूजा जाए हम शिव रूप में जैसे प्रकृति में कैलाश पर्वत को, नदियों में गंगा जी को, वनस्पतियों में बेल नीम पीपल बट वृक्ष आदि को पूजा जाता है यह साक्षात शिव की ही पूजा है, जीव रूप में सभी कल्याण करने वाले जीवो की पूजा जैसे गौ माता की,, नदी की और सर्व देव की पूजा की जाती है, भोलेनाथ की ही पूजा है, एक अर्थ यह है कि शिव की पूजा करने वाला स्वयं शिव हो जाए अर्थात शिव की पूजा कर रहे हैं और आप किसी का बुरा कर रहे हैं तो आपकी पूजा कभी सार्थक नहीं होती है जैसे कि रावण शिव का परम भक्त था लेकिन उसका हृदय कपट और छल से भरा हुआ था वह पापी था तो ऐसे लोगों की पूजा भगवान शिव स्वीकार नहीं करते

               परिचर्चा में तिलक राम दुबे जी ने अमृत वचन में कहा कि "यदि आपको हर चीज सकारत्मक तरीके से लेने की आदत है तो आप जिन्दगी के हर पल का आनन्द उठायेंगे चाहे वह सुख हो या दु:ख,"
                बाबा जी ने सकारात्मक सोच पर अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि कभी-कभी हम सोचते हैं कि हमारे सोचने से सकारात्मक ऊर्जा बनती है, परंतु जहां तक देखा जाए तो सकारात्मक सोच हेतु तीन चीजों की आवश्यकता होती है सर्वप्रथम अपनी सोच, हमेशा खुश रहे तो आपके विचार भी हमेशा प्रसन्नता पूर्वक अच्छे ही होंगे, मनुष्य विचारों को हमेशा प्रसन्न रखे तो हमेशा अच्छे ही विचार आएंगे, दूसरा है कि जो परमात्मा चाहेगा वही होगा, इसलिए परमात्मा की कृपा बिना भी सकारात्मकता नहीं आती है, जीवन में हमेशा संतुष्ट रहें और परमात्मा पर भरोसा रखें और तीसरा है कि आप एक दूसरे के प्रति क्या सोचते हैं, एक दूसरे के प्रति प्रेम हो क्षमा का भाव हो तो सकारात्मकता अपने आप ही उत्पन्न हो जाती है इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग संपन्न हुआ 
जय गौ माता जय गोपाल जय सियाराम

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