रावण के पुतले को जलाने से पहले अपने अंदर के अवगुणों को खत्म करें संतलाल साईं

रावण के पुतले को जलाने से पहले अपने अंदर के अवगुणों को खत्म करें संतलाल साईं

रावण के पुतले को जलाने से पहले अपने अंदर  के अवगुणों को खत्म करें संतलाल साईं

रावण के पुतले को जलाने से पहले अपने अंदर  के अवगुणों को खत्म करें संतलाल साईं



दशहरा उत्सव के अवसर पर श्री झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाठा  के संत लाल साईं जी के द्वारा वार्ड  नंबर 12 चकरभाटा में रावण दहन व सत्संग का आयोजन किया गया
सत्संग की शुरूआत भगवान श्री रामचंद्र जी के फोटो पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित करके की  गई

सत्संग में संत लाल साई  जी ने अपनी अमृतवाणी में
एक ज्ञानवर्धक कथा बताइए
एक गांव में 100 परिवार रहते थे
हर साल दशहरा  के दिन रावण  होता था 
समय बीतता गया जो बच्चा छोटा था हर साल रावण दहन देखने  जाता था

इस बार उसने सोचा कि मैं खुद रावण  का पुतला बनाऊंगा 
और सुबह से ही रावण का पुतला बनाने में जुट  गया
शाम तक रावण का पुतला बनाकर खड़ा किया
व पल भी आ गया जब रावण का दहन होना  था जब वह व्यक्ति रावण को जलाने के लिए आगे बढ़ा तो उस पतले से आवाज आई रुको मुझे जलाने से पहले मेरे एक सवाल का जवाब दो

वाह व्यक्ति घबरा गया इधर उधर देखने लगा उसे समझ में नहीं आया कि आवाज कहां से आ रही है जैसे ही सामने रावण के पुतले को देखा तो फिर आवाज आएगी मैं रावण बोल रहा हूं तुम लोग हर साल दशहरे के दिन मेरा दहन  करते हो पुतला  बनाकर
ऐसा क्यों करते हो मैंने क्या किया है
तब उस व्यक्ति ने कहा हे रावण  तुमने माता सीता का हरण किया था जो की घोर पाप  था  इसीलिए हर साल दशहरे के दिन   हम तुम्हारे पुतले का दहन है 
तब फिर रावण के पुतले से आवाज आई मैंने जो पाप किया उसकी सजा मुझे मिल गई पर क्या तुम लोग भी पापी नहीं हो तुम लोगों भी पाप  नहीं करते हो
पहले अपने अंदर के जो अवगुण हैं जिससे कारण लोग पाप करते हो उसे खत्म करो फिर मेरे पुतले का दहन करो मैंने जो गलती की है वह गलती तुम लोग नहीं करो
आज मैं पुतले के दहन के  साथ अपने सारे अवगुण को भी जला दो उस व्यक्ति की आंखें खुल गई और उसने हाथ जोड़कर कहा मैं आपकी बात समझ गया आज से मैं अपने सारे अवगुण को खत्म करूंगा वह पाप नहीं करूंगा सबसे प्रेम करूंगा सत्य की राह पर चलूंगा
इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों के अवगुण हम जल्दी देख लेते हैं पर अपने अवगुणों को हम देख नहीं पाते हैं पहले अपने अवगुणों को हम दूर करें तभी हमारा भला हो सकता है
वह अपने धर्म को न भूलें हिंदू धर्म सनातन धर्म है सबसे पुराना धर्म है अपने धर्म की रक्षा करें अपने धर्म का प्रचार प्रसार करें उसे आगे बढ़ाएं

साईं जी के द्वारा कई भक्ति भरे भजन गाए गए


रामजी की निकली सवारी रामजी की लीला है न्यारी एक तरफ भृता लक्ष्मण एक तरफ माता  सीता बीच में बैठे हैं जगत के पालनहारी

 हे राम हे राम तू ही माता तू ही पिता तू ही जगत के पालनहार 
हे राम

राम नाम का जाप भी किया गया
कार्यक्रम के आखिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया गया
रावण के पुतले की  विधि विधान से पूजा की गई
उसका दहन किया गया
आयोजन किया गया अरदास की गई तो पाया गया
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूज्य सिंधी पंचायत चकरभाटा बाबा गुरमुख  दास सेवा समिति चकरभाटा के सभी सदस्यों का  सहयोग रहा



श्री विजय दुसेजा जी की खबर

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