परमात्मा ने हमको यह अनमोल मानव जीवन दिया है इस मानव तन को प्राप्त करने के लिए देवता भी तरसते है अगर इस मानव जीवन जीने में मनुष्य ने दान पुन नही किया तो मनुष्य का मानव जीवन ही व्यर्थ है ये कहना है भाई साहिब अमर रूपानी जी का।चकरभाटा स्थित रामा वेली में भक्तों द्वारा एक दिवसीय सतसंग का आयोजन किया गया जिसमें अमर रूपानी जी ने कहा की मनुष्य को अपने जीते जी दान करना चाहिए क्योंकि मरने के बाद उसे नही पता चलता की उसके परिवार वालों ने क्या दान किया अत: मनुष्य को अपने जीते जी दान करना चाहिए।सूर्य पुत्र कर्ण ने अपने कुंडल एवं कवच दान कर दिए जबकि उसे पता था कि इसे देने से मेरी मृत्यु हो जाएगी तो भी उस ने दान किया आज उसे दान वीर कर्ण के नाम से जाना जाता है।दान भी अनेको प्रकार से कर सकते है जैसे गौ दान,गरीब कन्या के विवाह में दान,दीन-दुखियों की सेवा करके, गरीब बाह्मण को दान देकर अपना मानव जीवन सफल बना सकते है श्री विजय दुसेजा जी की खबर