*जनहित की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं हूँ,जेल भेज दो या जान से मार दो सब चलेगा - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*जनहित की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं हूँ,जेल भेज दो या जान से मार दो सब चलेगा - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*जनहित की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं हूँ,जेल भेज दो या जान से मार दो सब चलेगा - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*जनहित की लड़ाई से पीछे हटने वाला नहीं हूँ,जेल भेज दो या जान से मार दो सब चलेगा - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में उत्तरपुस्तिका खरीद में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाले दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने के बजाय शिकायतकर्ता को ही एफआईआर और कानूनी धाराओं की धमकी देना लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला दमन है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि उन्होंने उत्तरपुस्तिका खरीद में कथित अनियमितताओं,पारदर्शिता की कमी एवं निजी फर्म को लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की मांग करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति को शिकायत भेजी थी।यही विषय पत्रिका समाचार पत्र में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ,जिसमें विश्वविद्यालय की खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए।लेकिन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय विश्वविद्यालय प्रबंधन शिकायतकर्ता को डराने और दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय द्वारा भेजे गए पत्र में 26 मई को उपस्थित होने की सूचना भेजने का दावा किया गया है, जबकि ऐसी कोई सूचना उन्हें प्राप्त ही नहीं हुई।
 यदि बिना सूचना दिए अनुपस्थित बताकर कार्रवाई का आधार बनाया जा रहा है यह राज्यपाल कार्यालय को भी गुमराह करने गंभीर मामला है,जिसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।जिसकी जानकारी राज्यपाल रमेन डेका को उनके द्वारा दी गई है और जांच की मांग किया गया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि लोकतंत्र में भ्रष्टाचार की शिकायत करना अपराध नहीं है। यदि कोई नागरिक जनहित में शिकायत करता है और उसे भारतीय न्याय संहिता की धाराओं का भय दिखाकर एफआईआर की धमकी दी जाती है,तो यह न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है बल्कि भविष्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को डराने का प्रयास भी है।उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे शिकायतकर्ता को धमकाने के बजाय खरीद प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच का स्वागत करना चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने स्पष्ट कहा कि वे सत्य,पारदर्शिता और जनहित की लड़ाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं।चाहे उन्हें जेल भेज दे या जान से मार दे,लेकिन जब तक जिंदा हैं जनहित के लिए मुखरता के साथ आवाज उठाते रहेंगे।

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