भागवत कथा में तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए भक्ति व दृढ़ संकल्प का बताया महत्व

भागवत कथा में तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए भक्ति व दृढ़ संकल्प का बताया महत्व

भागवत कथा में तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए भक्ति व दृढ़ संकल्प का बताया महत्व
भागवत कथा में तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए भक्ति व दृढ़ संकल्प का बताया महत्व

दिलीप वर्मा
9424211900
तिल्दा नेवरा ग्राम पंचायत कोहका में जायसवाल परिवार द्वारा स्व.भरत लाल जायसवाल की स्मृति में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भगवताचार्य पूज्य पूजा किशोरी जी ने ध्रुव चरित्र कथा का वर्णन किया।

 ध्रुव की कथा के माध्यम से श्रोताओं को भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया। पूज्य पूजा किशोरी ने कहा कि एक बार उत्तानपाद सिंहासन पर बैठे हुए थे। ध्रुव खेलते हुए राज के महल में पहुंच गए। उस समय उनकी अवस्था 5 वर्ष की थी।

उत्तम राजा उत्तानपाद की गोदी में बैठा हुआ था। ध्रुव राजा की गोदी में चढ़ने का प्रयास करने लगे। सुरुचि को अपने सौभाग्य का इतना अभिमान था कि उसने ध्रुव को डांटा और कहा गोद में चढ़ने का तेरा अधिकार नहीं है। अगर इस गोद में चढ़ना है तो पहले भगवान का भजन करके इस शरीर का त्याग कर और फिर मेरे गर्भ से जन्म लेकर मेरा पुत्र बन। तब तू इस गोद में बैठने का अधिकारी होगा।

ध्रुव को अपनी सौतेली माता के इस व्यवहार पर बहुत क्रोध आया, पर वह कर ही क्या सकता था? इसलिए वह अपनी मां सुनीति के पास जाकर रोने लगा। सारी बातें जानने के बाद सुनीति ने कहा, 'संपूर्ण सुखों को देने वाले भगवान नारायण के अतिरिक्त तुम्हारे दुःख को दूर करने वाला और कोई नहीं है। तू केवल उनकी भक्ति कर। 
कथा प्रतिदिन दोपहर 2.00 बजे से हरी इच्छा तक चल रही है। भागवत कथा का समापन 9 मई को हवन शांति व प्रसादी वितरण के साथ होगा।

इस अवसर पर आयोजक जायसवाल परिवार के सदस्य परीक्षित अनिल अंजलि, चेतन वेदमंडी, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रोतागण मौजूद रहे।

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