96 वर्षों से पीपल की छाया में विराजी हैं माता, चैत्र नवरात्रि में प्रज्वलित होंगे 100 ज्योति कलश

96 वर्षों से पीपल की छाया में विराजी हैं माता, चैत्र नवरात्रि में प्रज्वलित होंगे 100 ज्योति कलश

96 वर्षों से पीपल की छाया में विराजी हैं माता, चैत्र नवरात्रि में प्रज्वलित होंगे 100 ज्योति कलश
बेमेतरा:- आस्था और चमत्कार का केंद्र है माँ आनंदी का पावन धाम

96 वर्षों से पीपल की छाया में विराजी हैं माता, चैत्र नवरात्रि में प्रज्वलित होंगे 100 ज्योति कलश


मेघू राणा बेमेतरा= बेमेतरा जिले के साजा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम राखी जोबा में स्थित आनंदी माता मंदिर आज अंचल के लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बन चुका है। दुर्ग-बेमेतरा मार्ग पर स्थित यह मंदिर न केवल अपनी आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है, बल्कि माता की चमत्कारी उपस्थिति से भी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर रहा है।
स्वप्न से शुरू हुई स्थापना की गाथा
मंदिर के पुजारी आचार्य देवेन्द्र दुबे बताते हैं कि इस पावन स्थल का इतिहास लगभग 96 वर्ष पुराना है। सन् 1930 में स्व. श्रीमती बशन्ता बाई अग्रवाल को माता जी ने स्वप्न में दर्शन दिए थे और पीपल के वृक्ष के नीचे अपने विराजमान होने का संकेत दिया था। माता के आदेशानुसार ग्रामवासियों ने मिलकर वहां मंदिर का निर्माण कराया, जो आज एक भव्य स्वरूप ले चुका है।
2022 में हुआ मंदिर का कायाकल्प
समय के साथ श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में वर्ष 2022 में मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया गया। नक्काशीदार दीवारों और आधुनिक सुविधाओं के साथ अब यह मंदिर और भी आकर्षक व सुविधाजनक हो गया है।
चैत्र नवरात्रि की विशेष तैयारियां
आगामी चैत्र नवरात्रि को लेकर मंदिर में विशेष उत्साह है। समिति के अनुसार, इस वर्ष कुल 100 ज्योति कलशों की स्थापना की जाएगी, जिनमें:
आनंदी माता मंदिर: 88 ज्योति कलश
मां शीतला माता मंदिर: 12 ज्योति कलश
नवरात्रि के दौरान यहां जोत-ज्वारा, विशेष पूजा-पाठ और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
प्राकृतिक शांति और सुगम मार्ग
पीपल वृक्ष की शीतल छाया में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान करता है। देवकर से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर कोदवा और देवकर के बीच स्थित होने के कारण यहां पहुंचना अत्यंत सुगम है। ग्रामवासियों का मानना है कि माता की कृपा से ही राखी जोबा और आसपास के क्षेत्रों में सुख, शांति और समृद्धि बनी हुई है।

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